दीपावली के दिन लक्ष्मी की पूजा की जाएगी। पूजा के समय कई छोटी-छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण परंपराओं का .....
 
दीपावली की पूजा की परंपराओं का वैज्ञानिक कारण
दीपावली के दिन लक्ष्मी की पूजा की जाएगी। पूजा के समय कई छोटी-छोटी, लेकिन महत्वपूर्ण परंपराओं का पालन किया जाता है, जैसे कलाई पर धागा बांधते समय चावल पीछे फेंकना, तिलक लगाना, तिलक लगाते समय रूमाल सिर पर रखना, कर्पूर से आरती करना आदि। यहा आपको मै हंस जैन बता रहा हूँ इन परंपराओं के वैज्ञानिक कारण और धार्मिक पक्ष...

1. पूजा में कलाई पर धागा बांधें : पूजा-पाठ, यज्ञ, हवन में पूजा करवाने वाले ब्राह्मण हमारी कलाई पर मौली (एक धार्मिक धागा) बांधते हैं। इसे रक्षासूत्र, कलेवा या मौली कहा जाता है।


2. चावल पीछे फेंकें : पूजा में कलाई पर मौली यानी धागा बांधते समय हाथ में चावल दिए जाते हैं। धागा बांधने के बाद उन चावलों को पीछे फेंक दिया जाता है।


3. तिलक लगाएं : किसी भी पूजा में तिलक लगाना महत्वपूर्ण परंपरा है। शास्त्रों के अनुसार हमें सूने माथे के साथ भगवान के सामने नहीं जाना चाहिए, क्योंकि यह शुभ नहीं माना जाता। माथे पर तिलक लगाना पूजा के लिए शुभ शकुन होता है। तिलक माथे पर या दोनों भौहों के बीच लगाया जाता है। तिलक कुमकुम या चंदन जैसी पवित्र चीजों से लगाया जाता है।


4. तिलक लगवाते समय सिर पर रूमाल रखें : पूजा करते समय या तिलक लगवाते समय सिर पर हाथ या रूमाल रखा जाता है। यह भगवान और तिलक लगाने वाले व्यक्ति के लिए सम्मान देना का एक तरीका है।


5. घर मै कर्पूर जलाएं : पूजा में किए जाने वाले सभी कर्मों का संबंध धर्म के साथ ही हमारे स्वास्थ्य से भी है। पूजा में आरती करना भी जरूरी क्रिया है। आरती में कर्पूर भी जलाया जाता है। कर्पूर जलाने की परंपरा के पीछे भी कई कारण मौजूद हैं। कर्पूर तीव्र उड़नशील पदार्थ है। यह सफेद रंग का होता है। इसमें तीखी गंध होती है।


6. कुश के या लाल कम्बल आसन पर बैठें : पूजा में बैठने के लिए विशेष प्रकार के आसन का उपयोग किया जाता है। यह कुश का बना होता है। कुश एक प्रकार की घास है। इस घास से बने आसन ही पूजा के लिए श्रेष्ठ बताए गए हैं। शास्त्रों के अनुसार कुश से बने आसन पर बैठकर पूजा करने से श्रेष्ठ फलों की प्राप्ति बहुत ही जल्दी होती है।


7. दीपावली पर लक्ष्मी के साथ गणेशजी की पूजा भी जरूर करें : दीपावली पर लक्ष्मी पूजन का विशेष महत्व बताया गया है, लेकिन लक्ष्मी की पूजा के साथ ही श्रीगणेश की पूजा भी अनिवार्य रूप से करनी चाहिए। श्रीगणेश प्रथम पूज्य हैं और इनकी पूजा के बिना कोई मांगलिक काम की पूरा नहीं हो सकता है। गणेशजी को शिवजी ने प्रथम पूज्य होने वरदान दिया था, इसी कारण इनकी पूजा सबसे पहले की जाती है।
Posted at 23 Apr 2020 by admin
FACEBOOK COMMENTES
  Share it --