प्रातः धन्वन्तरि जी की पूजा करे
धन्वन्तरि भगवानजी का चित्र स्थापित करे ||
पवत्रीकरण आचमन
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धन्वन्तरि तथा धनतेरस की पूजा
प्रातः धन्वन्तरि जी की पूजा करे
धन्वन्तरि भगवानजी का चित्र स्थापित करे ||
पवत्रीकरण आचमन
श्रीगणेश पूजन
ततपश्चात
धन्वन्तरि पूजन
ध्यान < अक्षत पुष्प >
देवान कृशान सुरसंघनि पीडितांगान
दृष्ट्वा दयालुर मृतं विपरीतु कामः |
पाथोधि मन्थन विधौ प्रकटौSभवधो
धन्वन्तरि: स भगवानवतात सदा नः ||
ॐ धन्वन्तरि देवाय नमः |
ध्यानार्थे अक्षत पुष्पाणि समर्पयामि ||
आचमन
< 3 बार जल के छींटे दे >
पाद्यं अर्घ्यं आचमनीयं समर्पयामि ||
स्नान
ॐ धनवन्तरयै नमः ||
स्नानार्थे जलं समर्पयामि ||
पञ्चामृत स्नान
ॐ धनवन्तरयै नमः ||
पञ्चामृत स्नानार्थे पञ्चामृत समर्पयामि ||
अब जल से
पञ्चामृत स्नानान्ते शुद्घोदक स्नानं समर्पयामि ||
इत्र से
सुवासितं इत्रं समर्पयामि ||
वस्त्र या मौली

वस्त्रं समर्पयामि ||
रोली या लालचन्दन से तिलक करे

गन्धं समर्पयामि ||
अक्षतान् समर्पयामि ||
पुष्पं समर्पयामि ||
धूपम आघ्रापयामि ||
दीपकं दर्शयामि ||
नैवेधं निवेदयामि ||
आचमनीयं जलं समर्पयामि ||
ऋतुफलं समर्पयामि ||
ताम्बूलं समर्पयामि ||
दक्षिणा समर्पयामि ||
कर्पूर नीराजनं दर्शयामि ||

धन्वन्तरी जी की प्रार्थना

अथो दधेर्मथ्य मानात काश्यपैर मृतार्थिभि: |
उदतिष्ठन्महाराज पुरुषः परमाद भुतः ||
दीर्धपीवरदोर्दण्ड: कम्बु ग्रीवोSरुणेक्षण: |
श्यामलस्तरुण: स्त्रग्वि भरण भूषित: ||
पीतवासा महोरस्क: सुमृष्ट मणि कुण्डल: |
स्निग्ध कुञ्चित केशान्त: सुभगः सिंहविक्रम: ||
अमृता पूर्णकलशं विभ्रद वलय भूषितः |
स वै भगवतः साक्षा द्विष्णौरंशांश सम्भवः ||
9 नवम्बर 2015
धनतेरस की शाम को

सांयकाल प्रदोषकाल में आप
अपने घर के मुख्य दरवाजे <बाहर> पर
अन्न की ढेरी पर दोनोतरफ दीपक जलाये और
उस समय यमराजजी का ध्यान करते हुए बोले
मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन च मया सह |
त्रयोदश्यां दीपदानात सूर्यजः प्रीयता मिति ||

फिर घर के अंदर मन्दिर में

माँलक्ष्मी जी की प्रतिमा के सामने
मध्य में श्रीयंत्र
दोनों तरफ श्रीपारद सुमेरपृष्ठ कुबेर यन्त्र , कनकधारा यन्त्र स्थापित करे ||
फिर यंत्रो के सामने रोली से अष्टभुज बनाये
षटकोण बनाकर उसमे घी का दीपक रखे
और बाहर 5 या 11 घी का दीपक रखे
फिर यंत्रो के सामने मिटटी के कलश पर स्वास्तिक बना कर
कलश में मेवा सिक्का < जो हो सके सोना चांदी > भी रखकर लाल कपड़े से बाँध दे
फिर कलश पर किसी पात्र में चावल भर कर रख दे
< यह सब भाईदूज तक ऐसे ही रहने दे >
फिर नारियल पर लाल कपड़ा लपेट कर कलश पर स्थापित करे ||
श्रीकुबेरजी का पूजन

आवाहन < अक्षत पुष्प >

आवाहयामि देव त्वामिहायामि कृपां कुरु |
कोशं वर्द्घय नित्यं त्वं परिरक्ष सूरेशश्वर ||
ध्यान < अक्षत पुष्प >

मनुज वाह्यविमानवर स्थितं गरुड़रत्न निभं निधिनायकम |
शिवसखं मुकुटादि विभूषितं वरगदे दधतंभज तुन्दिलम ||
अब आप कुबेरजी की प्रतिमा पर
आचमन
जलस्नान पञ्चामृतस्नान कराकर
इत्र अर्पित करे
वस्त्र या मौली अर्पित करे
नैवैध फल अर्पित कर
तिलक लगा कर धुप और दीप दिखा दे फिर दक्षिणा अर्पित करे
अब कपूर से आरती करे

धनदाय नमस्तुभ्यं निधिपद्याद्यिपाय च |
भगवन त्वतप्रसादेन धनधान्यादि सम्पदः ||
कर्पूर नीराजनं दर्शयामि
ॐ श्री कुबेराय नमः ||
श्रीकुबेर साधना

विनियोग

अस्य श्रीकुबेर मन्त्रस्य विश्रवाऋषि:
वृहतिच्छन्द: शिवमित्र धनेश्वरी देवता
ममाभीष्ट सिद्घयर्थे जपे विनियोगः ||
ऋष्यादिन्यास

ॐ विश्रवऋषये नमः शिरसि |
वृहतिच्छन्द से नमः मुखे |
शिवमित्र धनेश्वर देवतायै नमः हृदि |
विनियोगाय नमः सर्वांगें |
हृदयादिन्यास

ॐ यक्षाय हृदयाय नमः |
ॐ कुबेराय शिरसे स्वाहा |
ॐ वैश्रणवाय शिखायै वषट् |
ॐ धनधान्यादि पतये कवचाय हुं |
ॐ धनधान्य समृद्घिं में नेत्रत्रयाय वौषट् |
करन्यास

ॐ यक्षय अंगुष्ठाभ्यां नमः |
ॐ कुबेराय तर्जनीभ्यां नमः |
ॐ वैश्रवाणाय मध्यमाभ्यां नमः |
ॐ धनधान्य समृद्घिं में कनिष्ठकाभ्यां नमः |
ॐ देहिदापय स्वाहा करतलकर पृष्ठाभ्यां नमः |
अब हाथ में अक्षत पुष्प ले

मनुज वाह्यविमानवर स्थितं गरुण रत्ननिभं निधिनायकम् |
शिवसखा मुकुटादि विभूषितं वसादे दधतं भज तुन्दिलम ||
अब अपने सुबिधानुसार
मन्त्र का जाप करे

ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधि पतये धनधान्य समृद्घिं में
देहि दापय स्वाहा ||
अब आप का श्रीकुबेर पूजन पूर्ण हुआ
Posted at 30 Oct 2018 by admin
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