तिल के पौधे की जड़ और पत्तों के काढ़े से बालों को धोने से बालों का रंग काला हो जाता है। काले तिलों क.....
 
बालों के रोग
तिल के पौधे की जड़ और पत्तों के काढ़े से बालों को धोने से बालों का रंग काला हो जाता है।
काले तिलों के तेल को शुद्ध करके बालों में लगाने से बाल असमय में सफेद नहीं होते हैं। प्रतिदिन सिर में तिल के तेल की मालिश करने से बाल हमेशा मुलायम, काले और घने रहते हैं।
तिल के फूल और गोक्षुर को बराबर मात्रा में लेकर घी तथा शहद में पीसकर सिर पर लेप करने से गंजापन दूर होता है।
तिल के तेल की मालिश करने के 1 घंटे बाद एक तौलिया गर्म पानी में डुबोकर उसे निचोड़कर सिर पर लपेट लें तथा ठंडा होने पर दोबारा गर्म पानी में डुबोकर निचोड़कर सीने पर लपेट लें। इस प्रकार कम से कम 5 मिनट लपेटे रहने दें तथा इसके बाद ठंडे पानी से सिर को धो लें। ऐसा करने से बालों की रूसी दूर हो जाती है तथा बालों के अन्य कष्ट भी खत्म हो जाते हैं।
बालों को काला करने तथा बालों को झड़ने से रोकने के लिए प्रतिदिन तिल खाएं और इसके तेल को बालों में लगाएं। इससे बाल काले, लम्बे और मुलायम हो जाते हैं।
काला तिल, सूखा आंवला, सूखा भृंगराज, मिश्री, चारों को बराबर मात्रा में लेकर चूर्ण बना लें। इसमें से 6 ग्राम चूर्ण को प्रतिदिन सुबह-शाम खाकर ऊपर से 250 मिलीलीटर दूध पी लें तथा इसके साथ-साथ ब्रहाचर्य जीवन का भी पालन 1 साल तक करें। इससे लाभ मिलेगा।
250 ग्राम काला तिल, 250 ग्राम गुड़ दोनों को सही तरह से कूटकर रख लें। इसमें से रोजाना 50 ग्राम चूर्ण को खाने से शरीर में ताकत आती है। इससे अधिक पेशाब नहीं लगता और सफेद बाल भी काले हो जाते हैं।
बालों के झड़ने पर तिल का तेल लगाने से लाभ मिलता है और यह सिर को भी ठंडा रखता है।
10-10 ग्राम तिल के फूल, गोखरू नमक को एक साथ पीसकर मक्खन में मिलाकर बालों की जड़ में मालिश करने से बालों के सभी रोग मिट जाते हैं।
सफेद तिल और चीते की जड़ और माठा (मठ्ठा) इन चारों औषधियों को मिलाकर पीने से पलित (बाल सफेद होना) रोग ठीक हो जाता है। तिल का
Posted at 23 Apr 2020 by admin
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