Shreemad BhaagwatMahaaPuran kathaa chepter 6 (श्रीमद्भागवतमाहात्म्य-छटा अध्याय: सप्ताह यज्ञ कि विधि), page:1
 
।। ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः ।।

श्रीमद्भागवतमाहात्म्य: छटा अध्याय

सप्ताह यज्ञ कि विधि : पृष्ठ 1

[Share it]

श्रीसनकादि कहते हैं— नारदजी! अब हम आपको सप्ताह श्रवण की विधि बताते हैं। यह विधि प्राय: लोगो की सहायता और धन से साध्य कही गयी हैं॥1॥

पहले तो यत्नपुर्वक ज्योतिषि को बुलाकर मुहुर्त पुछना चाहिये तथा विवाह के लिये जिस प्रकार धन का प्रबन्ध किया जाता हैं उस प्रकार ही धन की व्यवस्था इसके लिये करनी चाहिये॥2॥ ॥2॥

कथा आरम्भ करने मे भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशिर्ष, आषाढ और श्रावण, ये छः महिने श्रोताओ के लिये मोक्ष कि प्राप्ति के कारक हैं॥3॥

देवर्शे! इन महिनो मे भी भद्रा-व्यतीपात आदि कुयोगो को सर्वथा त्याग देना चहिये, तथा दुसरे लोग जो उत्साही हो, उन्हे अपना सहायक बना लेना चाहिये॥4॥

फिर यत्न करके देश-देशान्तरों मे यह संवाद भेजना चाहिये कि यहाँ कथा होगी, सब लोगो को सपरिवार पधारना चाहिये॥5॥

स्त्री और शुद्रादि भगवत्कथा एवं संकिर्तन से दुर पड़ गये हैं। उनको भी सुचना हो जाय, ऐसा प्रबन्ध करना चाहिये॥6॥

देश-देश मे जो विरक्त वैशण्व और हरिकिर्तन के प्रेमी हों, उनके पास निमंत्रण पत्र अवश्य भेंजे। उसे लिखने कि विधि इस प्रकार बतायी गयी हैं॥7॥

'महानुभावों! यहाँ सात दिन तक सत्पुरुषों का बड़ा दुर्लभ समागम रहेगा और अपुर्व रसमयी श्रीमद्भागवत कथा होगी॥8॥

आप लोग भगवद्रस के रसिक हैं, अतः श्रीभागवतामृत का पान करने के लिये प्रेमपुर्वक शिघ्र ही पधारने कि कृपा करें॥9॥

यदि आपको विशेष अवकाश न हो तो भी एक दिन के लिये तो अवश्य ही कृपा करनी चहिये; क्योकि यहाँ तो एक क्षण भी अत्यंत दुर्लभ हैं'॥10॥

 Shri Bhagwatji (Page 1 of 10)
[First] [1] [2]  [3]  [4]  [5] [Last]