इस दिन की सेवा तुन्गविध्याजी के भाव की है एवं इस दिन का श्रृंगार भी निश्चित है, इस दिन को गुजरात म.....
 
व्रज - कार्तिक कृष्ण द्वादशी
इस दिन की सेवा तुन्गविध्याजी के भाव की है एवं इस दिन का श्रृंगार भी निश्चित है, इस दिन को गुजरात में वत्स बारस भी कहा जाता है.

श्री ब्रह्माजी अभिमानवश अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करने हेतु प्रभु श्रीकृष्ण की परीक्षा लेना चाहते थे कि सृष्टि की रचना मैं करता हूँ और यदि मैं इन गोप-बालकों व बछड़ों का अपहरण कर लूं तो एक क्षण में ही व्रज में हाहाकार मच जायेगा और आक्षेप भी श्रीकृष्ण पर ही आएगा.
प्रभु बच्छवन में गौ-चारण करते थे तब आज के दिन श्री ब्रह्माजी ने गोप-बालकों एवं बछड़ों का अपहरण कर उन्हें मूर्छित अवस्था में एक वर्ष तक एक कन्दरा में बंद कर दिया. परन्तु प्रभु ने अपनी अद्भुत लीला से सभी अपहृत जीवों की वैसी ही रचना कर उन्हें अपने-अपने स्थानों पर पूर्ववत भेज दिया.

ब्रह्मलोक का एक क्षण पृथ्वीलोक के एक वर्ष के सामान है अतः एक वर्ष पश्चात श्री बह्मा जी पुनः व्रज में हो रहे हाहाकार को देखने उसी स्थल पर पहुंचे. वो यह देख कर आश्चर्यचकित हो गये कि सभी जीव कृष्ण रूप में अपने-अपने स्थानों पर ही विहार कर रहे थे.
तुरंत उन्हें पश्चाताप हुआ और उन्होंने श्री केशव के चरणों में नतमस्तक हो क्षमायाचना की और सभी अपहृत जीवों को पुनः प्रभु को लौटाया.

जैसा कि कल भी मैंने बताया, कार्तिक कृष्ण दशमी से कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (अन्नकूट उत्सव) तक सात दिवस श्रीजी को अन्नकूट के लिए सिद्ध की जा रही विशेष सामग्रियां गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में अरोगायी जाती हैं.

ये सामग्रियां अन्नकूट उत्सव पर भी अरोगायी जाएँगी. इस श्रृंखला में आज विशेष रूप से श्रीजी को गोपीवल्लभ (ग्वाल) भोग में बूंदी के लड्डू अरोगाये जाते हैं.

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कल सोमवार, 09 नवम्बर 2015 को धनतेरस या धनवन्तरी जयन्ती है. श्री धनवन्तरी, भगवान विष्णु के 17वें अवतार, देवों के वैध व प्राचीन उपचार पद्दति आयुर्वेद के जनक हैं.
व्रज में गौवंश ही धन का स्वरुप है अतः श्री ठाकुरजी एवं व्रजवासी गायों का श्रृंगार करते हैं, उनका पूजन करते हैं एवं उनको थूली खिलाते हैं. आज से चार दिन दीपदान का विशेष महत्व है अतः व्रज में सर्वत्र दीपदान और रौशनी की जाती है.
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राजभोग दर्शन –

कीर्तन – (राग : सारंग)

मदन गोपाल गोवर्धन पूजत l
बाजत ताल मृदंग शंखध्वनि मधुर मधुर मुरली कल कूजत ll 1 ll
कुंकुम तिलक लिलाट दिये नव वसन साज आई गोपीजन l
आसपास सुन्दरी कनक तन मध्य गोपाल बने मरकत मन ll 2 ll
आनंद मगन ग्वाल सब डोलत ही ही घुमरि धौरी बुलावत l
राते पीरे बने टिपारे मोहन अपनी धेनु खिलावत ll 3 ll
छिरकत हरद दूध दधि अक्षत देत असीस सकल लागत पग l
‘कुंभनदास’ प्रभु गोवर्धनधर गोकुल करो पिय राज अखिल युग ll 4 ll

साज – लाल रंग के आधारवस्त्र (Base) पर सुनहरी सुरमा-सितारा के कशीदे के ज़रदोज़ी के काम (Work) वाली एवं हांशिया वाली पिछवाई धरायी जाती है. गादी, तकिया एवं चरणचौकी पर लाल मखमल की बिछावट की जाती है. सफेदी पूर्ण रूप से बड़ी कर (हटा) दी जाती है.

वस्त्र- श्रीजी को आज पीली ज़री की सूथन, चोली एवं घेरदार वागा धराये जाते हैं. ठाड़े वस्त्र हरे रंग के धराये जाते हैं.

श्रृंगार – प्रभु को आज मध्य का (घुटने तक) हल्का श्रृंगार धराया जाता है. हीरा, मोती, पन्ना तथा सोने के सर्व आभरण धराये जाते हैं. श्रीमस्तक पर सुनहरी ज़री की पाग के ऊपर सिरपैंच, लूम, चमक की चन्द्रिका एवं बायीं ओर शीशफूल धराये जाते हैं. श्रीकर्ण में कर्णफूल धराये जाते हैं. श्वेत एवं गुलाबी पुष्पों की दो सुन्दर मालाजी धरायी जाती है. श्रीहस्त में कमलछड़ी, सोने के वेणुजी एवं दो वेत्रजी धराये जाते हैं.

जय श्री कृष्णा
आज के दर्शन
Posted at 03 Nov 2018 by admin
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