bhakti Darpan: bhartiya sanskriti and hindu religion related devotional and inspiral contents for devotion like story, shri raamcharit manas, shrimad bhagwat geeta all in hindi language
 
भगवान शिव
आज से 15 से 20 हजार वर्ष पूर्व वराह काल की शुरुआत में जब देवी-देवताओं ने धरती पर कदम रखे थे, तब उस काल में धरती हिमयुग की चपेट में थी। इस दौरान भगवान शंकर ने धरती के केंद्र कैलाश को अपना निवास स्थान बनाया। विष्णु ने समुद्र को और ब्रह्मा ने नदी के किनारे को अपना स्थान बनाया था। पुराण कहते हैं कि जहां पर शिव विराजमान हैं उस पर्वत के ठीक नीचे पाताल लोक है, जो भगवान विष्णु का स्थान है। शिव के आ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

भगवान का जो नाम है, ये भगवान से भी बडा है।
भगवान का नाम अग्निस्वरूप है । जैसे आग जो होती है उसमें हम कुछ भी चीज डाले, गीली या सूखी, सब कुछ उसमें जल जाता है । हमने जो चीज आग में डाल दी वो जल जाएगी।ऐसे ही भगवान का नाम है व्यक्ति कैसे भी ले,वो तो अपना असर दिखाएगा, जैसे अग्नि का काम है जलाना वैसे ही भगवान का नाम लिया आपने, तो वो असर दिखाएगा अब चाहे व्यक्ति हँस के ले, गा के ले, उठते-बैठते कैसे भी ले, क्रोध से कहे, प्रेम से कहे, वो कभी खाली नह..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

तुलसी केवल पौधा नहीं है।
क्या आपने कभी इस बात पर ध्यान दिया कि आपके घर, परिवार या आप पर कोई मुसीबत आने वाली होती है तो उसका असर सबसे पहले आपके घर में स्थित तुलसी के पौधे पर होता है। आप उस पौधे का कितना भी ध्यान रखें धीरे-धीरे वो पौधा सूखने लगता है। तुलसी का पौधा ऐसा है जो आपको पहले ही बता देगा कि आप पर या आपके घर परिवार को किसी मुसीबत का सामना करना पड़ सकता है।पुराणों और शास्त्रों के अनुसार माना जाए तो ऐसा इसलिए..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

भारत की 11 खूबसूरत जगह, जहां छुपे हैं कई अनसुलझे रहस्य
[b]1. श्री रामसेतु :[/b] रामसेतु एक आश्चर्यजनक ऐतिहासिक पक्ष है जो भौतिक रूप में उत्तर में बंगाल की खाड़ी को दक्षिण में शांत और स्वच्छ पानी वाली मन्नार की खाड़ी से अलग करता है, जो धार्मिक एवं मानसिक रूप से दक्षिण भारत को उत्तर भारत से जोड़ता है। यह भारत और श्रीलंका के बीच उथली चट्टानों की एक चेन है। इसे भारत में रामसेतु व दुनिया में एडम्स ब्रिज के नाम से जाना जाता है। इस पुल की लंबाई लगभग 48 ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

गायत्री मंत्र
हिन्दू धर्म में सबसे बड़ा और प्रसिद्ध मंत्र गायत्री मंत्र माना जाता है। गायत्री मंत्र पूजा का सिर्फ एक साधन नहीं है बल्कि यह अपने आप में ही प्रभु की आराधना का माध्यम है। इस संसार में सूर्यदेव को एकमात्र दिखाई देने वाला देवता माना जाता है। भगवान सूर्य के महत्त्व को दर्शाने वाला गायत्री मंत्र निम्न है: गायत्री मंत्र के फायदे हिन्दू धर्म में गायत्री मंत्र को विशेष मान्यता प्राप्त..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

नारी का भी समान अधिकार है
सप्तऋषियों में एक ऋषि भृगु थे, वो स्त्रियों को तुच्छ समझते थे। वो शिवजी को गुरुतुल्य मानते थे, किन्तु माँ पार्वती को वो अनदेखा करते थे।एक तरह से वो माँ को भी आम स्त्रियों की तरह साधारण और तुच्छ ही समझते थे। महादेव भृगु के इस स्वभाव से चिंतित और खिन्न थे। एक दिन शिव जी ने माता से कहा, आज ज्ञान सभा में आप भी चले। माँ शिव जी के इस प्रस्ताव को स्वीकार की और ज्ञान सभा में शिव जी के साथ विरा..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

श्रीरामचरितमानस
तुलसीदासजी ने कब व कितने दिनों में लिखी श्रीरामचरितमानस?यूं तो हिंदू धर्म में अनेक पुराण व ग्रंथ हैं, लेकिन उन सभी में श्रीरामचरित मानस का अपना विशेष स्थान है। इस ग्रंथ में भगवान श्रीराम के जीवन का बहुत ही सुंदर वर्णन मिलता है। अगहन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी (इस बार 16 दिसंबर, बुधवार) को ही तुलसीदासजी ने श्रीरामचरितमानस की रचना की थी। श्रीरामचरित मानस व गोस्वामी तुलसीदासजी के बार..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

जानिए आरती के बाद क्यों बोलते हैं कर्पूरगौरं.. मंत्र ?
किसी भी मंदिर में या हमारे घर में जब भी पूजन कर्म होते हैं तो वहां कुछ मंत्रों का जप अनिवार्य रूप से किया जाता है। सभी देवी-देवताओं के मंत्र अलग-अलग हैं, लेकिन जब भी आरती पूर्ण होती है तो यह मंत्र विशेष रूप से बोला जाता है-कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारम्। सदा बसन्तं हृदयारबिन्दे भबं भवानीसहितं नमामि। । [b]ये है इस मंत्र का अर्थ :-[/b]इस मंत्र से शिवजी की स्तुति की जात..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

भगवान् सदाशिव
जिस समय सर्वत्र केवल अन्धकार-ही- अन्धकार था; न सूर्य दिखायी देते थे न चन्द्रमा, अन्यान्य ग्रह- नक्षत्रों का भी कहीं पता नहीं था; न दिन होता था न रात। अग्नि, पृथ्वी, जल और वायुकी भी सत्ता नहीं थी, उस समय एक मात्र सत् ब्रह्म अर्थात् सदाशिव की ही सत्ता विद्यमान थी, जो अनादि और चिन्मय कही जाती है। उन्हीं भगवान् सदाशिव को वेद, पुराण और उपनिषद् तथा संत-महात्म आदि ईश्वर तथा सर्वलोकमहेश्वर ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

क्या है ब्रह्मास्त और इसकी मारक क्षमता
संभवत: दुनिया का पहला [b]परमाणु बम[/b] छोड़ा था अश्वत्थामा ने। आधुनिक काल में जे.[b]रॉबर्ट ओपनहाइमर[/b] ने [b]गीता और महाभारत[/b] का गहन अध्ययन किया। उन्होंने महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र की संहारक क्षमता पर शोध किया और अपने मिशन को नाम दिया ट्रिनिटी (त्रिदेव)। रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 का बीच वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह कार्य किया। 16 जुलाई 1945 को इसका पहला परीक्षण किया गया। शोधकार्य के ब..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

केतकी के पुष्प
एक बार ब्रह्माजी व विष्णुजी में विवाद छिड़ गया कि दोनों में श्रेष्ठ कौन है। ब्रह्माजी सृष्टि के रचयिता होने के कारण श्रेष्ठ होने का दावा कर रहे थे और भगवान विष्णु पूरी सृष्टि के पालनकर्ता के रूप में स्वयं को श्रेष्ठ कह रहे थे। तभी वहां एक विराट ज्योतिर्मय लिंग प्रकट हुआ। दोनों देवताओं ने सर्वानुमति से यह निश्चय किया गया कि जो इस लिंग के छोर का पहले पता लगाएगा, उसे ही श्रेष्ठ माना ज..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

कार्तिक मास की महिमा और विधान
सृष्टि के मूल सूर्य की किरणों का उतरायण और दक्षिणायन में होना जगत का आधार है भगवान नारायण के शयन और प्रबोधन से चातुर्मास्य का  प्रारम्भ और समापन होता है उतरायण को देवकाल और दक्षिणायन को आसुरिकाल माना जाता है दक्षिणायन में सत्गुणों  के क्षरण से बचने और बचाने के लिए हमारे शास्त्रों में व्रत और तप का विधान है सूर्य का कर्क राशि पर आगमन दक्षिणायन का प्रारम्भ माना  जाता है और कातिक मास ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

जन्माष्टमी की पूजा में कैसे करें
जन्माष्टमी की पूजा में करें इन 10 चीजों का उपयोग :- जन्माष्टमी की पूजा और व्रत का अपना ही एक अलग महत्व है। इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा-अर्चना करने का विशेष महत्व माना जाता है। जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की पूजा में किन वस्तुओं का उपयोग करना ही चाहिए, इसके विषय में ब्रह्मवैवर्तपुराण में इस प्रकार विवरण दिया गया है। ब्रह्मवैवर्तपुराण के अनुसार, जन्माष्टमी की पूजा में इन वस्तुओं का विशे..........
Posted at 14 Nov 2018 by Admin

शिवलिंग का मतलब क्या होता है????
क्या आप जानते हैं, कि शिवलिंग का मतलब क्या होता है और, शिवलिंग किसचीज का प्रतिनिधित्व करता है?????? दरअसल कुछ मूर्ख और कुढ़मगज किस्मके प्राणियों ने परम पवित्र शिवलिंग को जननांग समझ कर पता नही क्या-क्या.....। और कपोल कल्पित अवधारणाएं फैला रखी हैं। परन्तु शिवलिंग वातावरण सहित घूमती धरती तथा सारे अनन्त ब्रह्माण्ड ( क्योंकि, ब्रह्माण्ड गतिमान है ) का अक्स/धुरी (ais) ही लिंग है। दरअसल ये गलतफह..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

श्रीकॄष्ण के जीवन के कुछ विशेष पहलू
* कॄष्ण के जन्म के समय और उनकी आयु केविषय में पुराणों व आधुनिकमिथकविज्ञानियों में मतभेद हैं। कुछउनकी आयु १२५ और कुछ ११० वर्ष बताते हैं। व्यक्तिगत रूप से द्वितीय मत अधिकउचित प्रतीत होता है। * कृष्ण की त्वचा का रंग मेघश्यामल थाऔर उनके शरीर से एक मादक गंध स्रावितहोती थी अतः उन्हें अपने गुप्तअभियानों में इनको छुपाने का प्रयत्न करना पडता था। जैसे कि जरासंधअभियान के समय। वैसे यही खूब..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

हनुमान को वरदान
जय सियाराम जय जय सियाराम ! विघ्न विनाशक जय हनुमान !! “ प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया । राम लखन सीता मन बसिया ।।“ श्रीहनुमानजी संयोगकाल में भगवान् श्रीराम की सर्वांगीण सेवा करते हैं तथा वियुक्त होने पर, उनके भजन-चिंतन में ही डूबे रहते हैं—उनमें नित्य-युक्त रहते हैं | इनके चिंतन में भी अद्भुत विलक्षणता है | पतिव्रता पत्नी तो केवल स्मरण-चिंतन करके रह जाती है; परन्तु ये तो - “ प्रभु च..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

भगवा ध्वज
भगवा ध्वज भारत का ऐतिहासिक एवं सांस्कृति के साथ धर्म ध्वज है। यह हिन्दुओं के महान प्रतीकों में से एक है। इसका रंग भगवा (saffron) होता है। यह त्याग, बलिदान, ज्ञान, शुद्धता एवं सेवा का प्रतीक है। यह हिंदुस्थानी संस्कृति का शास्वत सर्वमान्य प्रतीक है। हजारों हजारों सालों से भारत के शूरवीरों ने इसी भगवा ध्वज की छाया में लड़कर देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर किये।..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

तुलसी जी को तोडने से पहले वंदन करो।
1. तुलसी जी को नाखूनों से कभी नही तोडना चाहिए,नाखूनों के तोडने से पाप लगता है। 2.सांयकाल के बाद तुलसी जी को स्पर्श भी नही करना चाहिए । 3. तुलसी जी भगवान् की बहुत प्रिय है इसलिए भगवान् तुलसी के भी भोग ग्रहण नही करते । 4. जो स्त्री तुलसी जी की पूजा करती है, उनका सौभाग्य अखण्ड रहता है । उनके घर सत्पुत्र का जन्म होता है । 5. द्वादशी के दिन तुलसी को नही तोडना चाहिए । 6. सांयकाल के बाद तुलसी जी लीला..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

गंगा में विसर्जित अस्थियां आखिर जाती कहां हैं.?
पतितपावनी गंगा को देव नदी कहा जाता है क्योंकि शास्त्रों के अनुसार गंगा स्वर्ग से धरती पर आई है। मान्यता है कि गंगा श्री हरि विष्णु के चरणों से निकली है और भगवान शिव की जटाओं में आकर बसी है। श्री हरि और भगवान शिव से घनिष्ठ संबंध होने पर गंगा को पतित पाविनी कहा जाता है। मान्यता है कि गंगा में स्नान करने से मनुष्य के सभी पापों का नाश हो जाता है। एक दिन देवी गंगा श्री हरि से मिलने बैकुण्..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

पंचमुखी क्यो हुए श्री हनुमान
लंका में महा बलशाली मेघनाद के साथ बड़ा ही भीषण युद्ध चला। अंतत: मेघनाद मारा गया। रावण जो अब तक मद में चूर था राम सेना, खास तौर पर लक्ष्मण का पराक्रम सुनकर थोड़ा तनाव में आया।रावण को कुछ दुःखी देखकर रावण की मां कैकसी ने उसके पाताल में बसे दो भाइयों अहिरावण और महिरावण की याद दिलाई। रावण को याद आया कि यह दोनों तो उसके बचपन के मित्र रहे हैं।लंका का राजा बनने के बाद उनकी सुध ही नहीं रही थी। र..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

गाय से जुड़ी कुछ रोचक जानकारी।
1 गौ माता जीस जगह खडी रहकर आनंद पुर्वक चैन की सांस लेती है। वहा वास्तु दोष समाप्त हो जाते है। 2 गौ माता मे तैतीस कोटी देवी देवताओं का वास है। 3 गौ माता जीस जगह खुशी से रभांने से देवी देवता पुष्प वर्षा करते है। 4 गौ माता के गले मे घंटी जरूर बांधे गाय के गले मे घंटी बजने से गौ आरती होती है। 5 जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पुजा करता है। उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है। 6 ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

स्कन्द जी द्वारा अर्जुन को ब्रह्माण्ड का ज्ञान
सृष्टि से पहले यहाँ सब कुछ अव्यक्त एवं प्रकाश शून्य था, उस अव्याकृत अवस्था में प्रकृति और पुरुष-ये दो अजन्मा (जन्मरहित) एक दूसरे से मिल कर एक हुए, यह हम सुना करते हैं। तत्पश्चात अपने स्वरूपभूत स्वभाव और काल की प्रेरणा ओने पर पुरुष के ईक्षण (सृष्टिविषयक संकल्प) से क्षोभ को प्राप्त हुई प्रकृति से महत्त्व की उत्पत्ति हुई, फिर महत्त्व में विकार आने पर अहंकार उत्पन्न हुआ। मुनियों ने ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

दशावतार
एक माँ अपने पूजा-पाठ से फुर्सत पाकर अपने विदेश में रहने वाले बेटे से फोन पर बात करते समय पूँछ बैठी: बेटा! कुछ प्रार्थना भी करते हो या फुर्सत ही नहीं मिलती? बेटे ने माँ को बताया - "माँ, मैं एक आनुवंशिक वैज्ञानिक हूँ| मैं अमेरिका में मानव के विकास पर काम कर रहा हूँ| विकास का सिद्धांत, चार्ल्स डार्विन; क्या आपने उसके बारे में सुना है ?" उसकी माँ मुस्कुरा कर बोली - “मैं डार्विन के बारे में जानत..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

जानिए पौराणिक काल के 24 चर्चित श्राप और उनके पीछे की कहानी
हिन्दू पौराणिक ग्रंथो में अनेको अनेक श्रापों का वर्णन मिलता है। हर श्राप के पीछे कोई न कोई कहानी जरूर मिलती है। आज हम आपको हिन्दू धर्म ग्रंथो में उल्लेखित 24 ऐसे ही प्रसिद्ध श्राप और उनके पीछे की कहानी बताएँगे।[b]1. युधिष्ठिर का स्त्री जाति को श्राप :- [/b]महाभारत के शांति पर्व के अनुसार युद्ध समाप्त होने के बाद जब कुंती ने युधिष्ठिर को बताया कि कर्ण तुम्हारा बड़ा भाई था तो पांडवों को बह..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

ये 10 दैवीय वस्तुएं आज भी कहीं हैं
भारत देश को योग, ध्यान, अध्यात्म, रहस्य और चमत्कारों का देश माना जाता है। वेद, पुराण, रामायण और महाभारत में ऐसी हजारों घटनाक्रम और वस्तुओं के बारे में वर्णन मिलता है जिन पर आधुनिक युग में शोध जारी है। चमत्कार और विज्ञान की ऐसी-ऐसी अजीब बातें हैं जिनमें से कुछ की वैज्ञानिक पुष्‍टि होने के बाद उन पर अब सहज ही विश्वास किया जाने लगा है। प्राचीनकाल में ऐसी वस्तुएं थीं जिनके बल पर देवता या म..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

भगवान श्री कृष्ण जिवन परिचय
भगवान् श्री कृष्ण को अलग अलग स्थानों में अलग अलग नामो से जाना जाता है। उत्तर प्रदेश में कृष्ण या गोपाल गोविन्द इत्यादि नामो से जानते है। राजस्थान में श्रीनाथजी या ठाकुरजी के नाम से जानते है। महाराष्ट्र में बिट्ठल के नाम से भगवान् जाने जाते है। उड़ीसा में जगन्नाथ के नाम से जाने जाते है। बंगाल में गोपालजी के नाम से जाने जाते है। दक्षिण भारत में वेंकटेश या गोविंदा के नाम से जाने जात..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

शिवजी
1. क्यों हैं शिव की तीन आंखें? आपके मन में भी यह सवाल जरुर उठा होगा कि भगवान शिव को त्रिनेत्रधारी क्यों कहते हैं और उनकी यह इस तीसरी आंख किस चीज की प्रतीक है। दरअसल, आंखों का काम होता है रास्ता दिखाना। जीवन में कई बार ऐसे संकट आते हैं, जिन्हें हम समझ नहीं पाते। ऐसे में विवेक और धैर्य ही सच्चे मार्गदर्शक के रूप में हमें सही-गलत की पहचान कराते हैं। भगवान शिव की तीसरी आंख, आज्ञा चक्र का स्था..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

ब्रह्मास्त्र
[b]क्या है ब्रह्मास्त्र और इसकी मारक क्षमता[/b] संभवत: दुनिया का पहला परमाणु बम छोड़ा था अश्वत्थामा ने। आधुनिक काल में जे. रॉबर्ट ओपनहाइमर ने गीता और महाभारत का गहन अध्ययन किया। उन्होंने महाभारत में बताए गए ब्रह्मास्त्र की संहारक क्षमता पर शोध किया और अपने मिशन को नाम दिया ट्रिनिटी (त्रिदेव)। रॉबर्ट के नेतृत्व में 1939 से 1945 का बीच वैज्ञानिकों की एक टीम ने यह कार्य किया। 16 जुलाई 1945 को इ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

इन 7 को बस देख लेने से ही मिल जाता है पुण्य लाभ
गरुण पुराण के अनुसार इन 7 को बस देख लेने से ही मिल जाता है पुण्य लाभ, जीवन में पुण्य और लाभ पाने के लिए हर मनुष्य कई धर्म-कर्म करता है। शास्त्रों में ऐसे कई कामों के बारे में बताया गया है, जिन्हें करने से मनुष्य को पुण्य मिलता है। गरुड़ पुराण में कुछ ऐसी भी चीजें बताई गई हैं, जिन्हें केवल देख लेने से ही मनुष्य को पुण्य और लाभ की प्राप्ति हो जाती है। [b]श्लोक : गोमूत्रं गोमयं दुन्धं गोधूलि..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

एकादशी के दिन वर्जित है - चावल खाना
हमारे धर्म शास्त्रों के अनुसार एकादशी के दिन चावल खाना वर्जित है। ऐसा माना गया है कि इस दिन चावल खाने से प्राणी रेंगने वाले जीव की योनि में जन्म पाता है, किन्तु द्वादशी को चावल खाने से इस योनि से मुक्ति भी मिल जाती है।एकादशी की विशिष्टता बताते हुवें शास्त्रों में कहा गया है कि - ‘न विवेकसमो बन्धुर्नैकादश्या: परं व्रतं’अर्थात् - विवेक के सामान कोई बंधु नहीं है और एकादशी से बढ़ कर ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

कार्तिक-मास में दीपदान का महत्व
जो व्यक्ति कार्तिक मास में श्रीकेशव के निकट अखण्ड दीपदान करता है, वह दिव्य कान्ति से युक्त होकर विष्णुलोक में विहार करता है। एक ओर समस्त दान और दूसरी ओर कार्तिक मास में दीपदान बराबर नहीं होने के कारण दीपदान का ही अधिक महत्व है। यहाँ तक कि जो लोग कार्तिक मास में श्रीहरि के मन्दिर में दूसरों के द्वारा रक्खे गये दीपों को प्रज्वलित करते हैं, उन्हें यम यातना भोग नहीं करनी पड़ती। ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

एकादशी के दिन क्या करे क्या ना करे
धर्म ग्रंथो में सभी तिथियों में एकदशीई को सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस दिन किये गए जप-तप का बहुत अधिक महत्तव है। धर्म ग्रंथो के अनुसार एकादशी के दिन 11 ऐसे काम है जो करना वर्जित है। आइए आपको ग्रुप मे आपको बता रहा हूँ । [b]जुआ खेलना : [/b]जुआ खेलना एक सामाजिक बुराई है। जो व्यक्ति जुआ खेलता है, उसका परिवार व कुटुंब भी नष्ट हो जाता है। जिस स्थान पर जुआ खेला जाता है, वहां अधर्म का राज होता है। ऐस..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

वृंदावन के सप्तदेवालय
हमारे धर्म में नाम-जप को ही वैष्णव धर्म माना गया है और भगवान श्रीकृष्ण को प्रधानता दी गई है। चैतन्य महाप्रभु जी ने इन्हीं की उपासना की और नवद्वीप से अपने छः प्रमुख अनुयायियों को वृंदावन भेजकर वहां सप्त देवालयों की आधारशिला रखवाई। गौरांग प्रभुजी ने जिस गौड़ीय संप्रदाय की स्थापना की थी। उसमें षड्गोस्वामियों की अत्यंत अहम भूमिका रही। इन सभी ने भक्ति आंदोलन को व्यवहारिक स्वरूप प्र..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

शिव पुराण के अनुसार 12 ज्योतिर्लिंग
शिव पुराण के अनुसार प्रमुख द्वादश ज्योतिर्लिंग इस प्रकार हैं, जिनमें नाम श्रवण मात्र से मनुष्य का किया हुआ पाप दूर भाग जाता है। [b]1. श्री सोमनाथ : [/b]प्रथम ज्योतिर्लिंग सौराष्ट्र में अवस्थित ' सोमनाथ ' का है। यह स्थान काठियावाड़ के प्रभास क्षेत्र में है। [b]2. श्री मल्लिकार्जुन : [/b]आन्ध्र प्रदेश के कृष्णा ज़िले में कृष्णा नदी के तट पर श्रीशैल पर्वत पर श्रीमल्लिकार्जुन विराजमान हैं। इ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

मां काली पूजा
काली पूजा महाविद्या की पूजा में प्रिंसिपल पूजा में से एक माना जाता है। काली पूजा नया चाँद की रात को प्रदर्शन किया जा रहा है। मां काली के अंधेरे संस्कार और दानव पूजा के साथ जुड़ा हुआ है, क्योंकि मां काली के लिए किया जा रहा प्रसाद भक्ति का पूरा साथ किया जाना चाहिए। नाम काली वह धारण उपस्थिति के लिए, कि अंधेरे त्वचा, रक्त के साथ गंदा है कि tusked चेहरे की वजह से दिया गया था। मां काली राक्षसों क..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

ब्रह्माजी की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में हुआ था प्रभु श्रीराम का जन्म
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए, 2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए, 3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे, 4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था, 5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की | 6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए, 7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था, 8 - विकुक्षि के पुत्र ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

एकादश रुद्र
शास्त्रों के मुताबिक शिव ग्यारह अलग-अलग रुद्र रूपों में दु:खों का नाशकरते हैं। यह ग्यारह रूप एकादश रुद्र के नाम से जाने जाते हैं। शम्भू – शास्त्रों के मुताबिक यह रुद्र रूप साक्षात ब्रह्म है।इस रूप में ही वह जगत की रचना, पालन और संहार करते हैं। पिनाकी – ज्ञान शक्ति रुपी चारों वेदों के के स्वरुप माने जाने वाले पिनाकी रुद्र दु:खों का अंत करते हैं। गिरीश – कैलाशवासी होने से रुद..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

राधा रानी जी
राधा रानी जी के वंशजसूर्यवंशी महाराज दिलीप हुए. वो बड़े गौ भक्त थे .राधा रानी सूर्य वंशी थीं. राम जी भी सूर्य वंशी थे. इनकी परम्परा इस प्रकार है. महाराज दिलीप तक तो एक ही वंश आता है. दिलीप ने गाय की भक्ति की क्योंकि उनको कामधेनु गाय का श्राप था.ये जब एक बार स्वर्ग में गये थे तो जल्दी-जल्दी में गाय को प्रणाम करना भूल गए थे. कामधेनु ने श्राप दिया कि तुम पुत्र की इच्छा से जा रहे हो तुम्हें प..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

भद्रा कौन है
ऐसा माना जाता है कि दैत्यों को मारने के लिए भद्रा गर्दभ (गधा) के मुख और लंबे पूंछ और 3 पैरयुक्त उत्पन्न हुई. पौराणिक कथा के अनुसार भद्रा भगवान सूर्य नारायण और पत्नी छाया की कन्या व शनि की बहन है. भद्रा काले वर्ण, लंबे केश, बड़े दांत वाली तथा भयंकर रूप वाली कन्या है. जन्म लेते ही भद्रा यज्ञों में विघ्न-बाधा पहुंचाने लगी और मंगल कार्यों में उपद्रव करने लगी तथा सारे जगत को पीड़ा पहुंचाने लगी.\..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

जानिये भारत भूमि के बारे मे विदेशियों की राय
1. अलबर्ट आइन्स्टीन - हम भारत के बहुत ऋणी हैं, जिसने हमें गिनती सिखाई, जिसके बिना कोई भी सार्थक वैज्ञानिक खोज संभव नहीं हो पाती। 2. रोमां रोलां (फ्रांस) - मानव ने आदिकाल से जो सपने देखने शुरू किये, उनके साकार होने का इस धरती पर कोई स्थान है, तो वो है भारत। 3. हू शिह (अमेरिका में चीन राजदूत)- सीमा पर एक भी सैनिक न भेजते हुए भारत ने बीस सदियों तक सांस्कृतिक धरातल पर चीन को जीता और उसे प्रभावित भ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

कुलधरा
ब्राह्मणों के क्रोध का प्रत्तिक जहा आज भी लोग जाने से डरते हे। राजस्थान के जैसलमेर शहर से 18 किमी दूर स्थित कुलधरा गाव आज से 500 सालपहले 600 घरो और 85 गावो का पालीवाल ब्रह्मिनो का साम्राज्य ऐसा राज्य था जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती हे। रेगिस्तान के बंजर धोरो में पानी नहीं मिलता वहा पालीवाल ब्रह्मिनो ने ऐसा चमत्कार किया जो इंसानी दिमाग से बहुत परे थी। उन्होंने जमीन पे उपलब्ध पानी का प..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

भागवत के विषय
बहुत लोगो को भागवत का ज्ञान ही नहीं होता है यंहा पर भगवत के विषयो को स्कंध के अनुसार बताया गया है,ताकि पाठक को भागवत के मूल विषय समझ मे आ जाये और इसके प्रति रुचि बढे.[b]श्रीमद्भागवत महात्म्य :- [/b]श्रीमद्भागवत के महात्म्य में ‘गोकर्णोपाख्यान’ और ‘भक्ति’ के कष्ट निवारण दोनों के माध्यम से ये बताया गया है कि श्रीमद्भागवत के केवल श्रवण मात्र से कैसे जीव का उद्धार हो जाता है. ‘श्रवण की महि..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

शिव लिंग हर साल बढ़ता है अद्भुत
हर साल इस शिवलिंग की लंबाई चमत्कारिक रूप से बढ़ रही हैछत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के मरौदा गांव में घने जंगल केबीच एक प्राकृतिक शिवलिंग है, जो भूतेश्वर नाथ के नाम सेप्रसिद्ध है। यह विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंगमाना जाता है। इस शिवलिंग से जुड़ा एक बहुत हीअनोखा रहस्य है, जो इसे और भी खास बनाता है। रहस्यकी बात यह है कि हर साल इस शिवलिंग की लंबाईचमत्कारिक रूप से बढ़ रही है। [b]हर सा..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

बैकुण्ठ से भी बढ़कर है ब्रज की महिमा
[b]'अहो भाग्यम्! अहो भाग्यम्। नन्दगोप ब्रजो कसाम, यन्मित्र परमानन्दं पूर्णब्रम्ह सनातनम्। आसामहो चरण रेणु जुषामहं स्यां, वृन्दावने किमपि लतौषधीनाम्।'[/b] इंद्रदेव स्तुति करते हैं कि:- 'हे भगवन् श्री बलराम और श्रीकृष्ण, आपके जो अति रमणीक स्थान हैं, उनमें हम जाने की इच्छा करते हैं पर जा नहीं सकते। [b]'अहो मधुपुरी धन्या वैकुण्ठाच्च गरीयसी। विना कृष्ण प्रसादेन क्षणमेकं न तिष्ठति॥'[/..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

गौ माता
1 गौ माता जीस जगह खडी रहकर आनंद पुर्वक चैन की सांस लेती है। वहा वास्तु दोष समाप्त हो जाते है। 2 गौ माता मे तैतीस कोटी देवी देवताओं का वास है। 3 गौ माता जीस जगह खुशी से रभांने से देवी देवता पुष्प वर्षा करते है। 4 गौ माता के गले मे घंटी जरूर बांधे गाय के गले मे घंटी बजने से गौ आरती होती है। 5 जो व्यक्ति गौ माता की सेवा पुजा करता है। उस पर आने वाली सभी प्रकार की विपदाओं को गौ माता हर लेती है। 6 ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

हिंदू परम्पराओं से जुड़े ये वैज्ञानिक तर्क
हिन्दूधर्म ही विश्व का एकमात्र ऐसा धर्म है जो "विज्ञान पर आधारित" है ! [b]1- कान छिदवाने की परम्परा: [/b]भारत में लगभग सभी धर्मों में कान छिदवाने की परम्परा है। [b][b]वैज्ञानिक तर्क- [/b] [/b]दर्शनशास्त्री मानते हैं कि इससे सोचने की शक्त‍ि बढ़ती है। जबकि डॉक्टरों का मानना है कि इससे बोली अच्छी होती है और कानों से होकर दिमाग तक जाने वाली नस का रक्त संचार नियंत्रित रहता है। [b] 2- माथे पर कुमकुम/तिल..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

श्री कृष्ण जिवन परिचय
* भगवान् श्री कृष्ण को अलग अलग स्थानों में अलग अलग नामो से जाना जाता है। * उत्तर प्रदेश में कृष्ण या गोपाल गोविन्द इत्यादि नामो से जानते है। * राजस्थान में श्रीनाथजी या ठाकुरजी के नाम से जानते है। * महाराष्ट्र में बिट्ठल के नाम से भगवान् जाने जाते है। * उड़ीसा में जगन्नाथ के नाम से जाने जाते है। * बंगाल में गोपालजी के नाम से जाने जाते है। * दक्षिण भारत में वेंकटेश या गोविंदा के नाम स..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

ॐ (ओउम्) [OM]
ॐ अर्थात् ओउम् तीन अक्षरों से बना है, जो सर्व विदित है... ।। अ उ म् ।। "अ" का अर्थ है उत्पन्न होना, "उ" का तात्पर्य है उठना, उड़ना अर्थात् विकास, "म" का मतलब है मौन हो जाना अर्थात् "ब्रह्मलीन" हो जाना। ॐ सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति और पूरी सृष्टि का द्योतक है। ॐ का उच्चारण शारीरिक लाभ प्रदान करता है। आओं जानें, ॐ कैसे है स्वास्थ्यवर्द्धक, और अपनाएं आरोग्य के लिए एक मात्र ॐ के उच्चा..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

शिवलिंग में अपने आप ही होता है जलाभिषेक
देवभूमि भारत ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और चमत्कारिक भूमि है। जब धरती पर देवी-देवता रहते थे, तो उस काल में उनके निर्देशन में धरती पर ऐसे स्थानों की खोज की गई जो धरती के किसी न किसी रहस्य से जुड़े थे या जिनका संबंध दूर स्थित तारों से था। इसी के चलते भारत में हजारों चमत्कारिक मंदिर और स्थान निर्मित हो गए जिनको देखकर आश्चर्य होता है। हर मंदिर से जुड़ी एक कहानी है जिसपर लोग आस्था रखते हैं। ऐस..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

हिन्दू धर्म के अनुसार विद्यमान परा शक्तियां
मनुष्य जाती में भुत, प्रेत, पिशाच, वैताल, डाकिनी इत्यादि, जातियों का अस्तित्व प्राचीन काल से ही हैं, परन्तु ये सभी परा शक्तियां हैं । जिस प्रकार हवा को नहीं देखा जा सकता हैं, परन्तु हवा वास्तव में विद्यमान हैं, उसी प्रकार ये मनुष्येतर जातियां भी आदि काल से अस्तित्व में हैं । इन सभी को समस्त भूतो के नाथ भगवान् भूतनाथ शिव का अनुचर माना जाता हैं तथा इनकी पत्नियाँ भुतिनी, प्रेतनी, पिसाचिनी..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

अघोर पंथ
अघोर पंथ के प्रणेता भगवान शिव माने जाते हैं। कहा जाता है कि भगवान शिव ने स्वयं अघोर पंथ को प्रतिपादित किया था। अवधूत भगवान दत्तात्रेय को भी अघोरशास्त्र का गुरू माना जाता है। अवधूत दत्तात्रेय को भगवान शिव का अवतार भी मानते हैं। अघोर संप्रदाय के विश्वासों के अनुसार ब्रह्मा, विष्णु और शिव इन तीनों के अंश और स्थूल रूप में दत्तात्रेय जी ने अवतार लिया। अघोर संप्रदाय के एक संत के रूप में ..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

माता भगवति बगलामुखि
आइये माता श्री बगला के बारे में जानते हैं 1. ईश्वर की जो छः कलाएं तन्त्र में वर्णित हैं, उनमें यह ‘‘पीता’’ कला है। इसीलिए इनका रंग पीला है, उनका वस्त्र पीला है, माला भी पीली है। साधक जब मन्त्र चैतन्य कर लेता है, तब वह मंत्र ‘‘जिह्वाग्र’’ पर आ जाता है। यही ‘‘जिह्वा’’ का ‘अग्रभाग’ देवी द्वारा पकड़ना है, और उसका घन-घन जप ही ‘‘गदाभिघात’’ है। 2. भगवती बगला दश-महाविद्याओं में चतुर्थ श्रेणी..........
Posted at 14 Nov 2018 by admin

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