राधा रानी जी के वंशज सूर्यवंशी महाराज दिलीप हुए. वो बड़े गौ भक्त थे .राधा रानी सूर्य वंशी थीं. रा.....
 
राधा रानी जी
राधा रानी जी के वंशज

सूर्यवंशी महाराज दिलीप हुए. वो बड़े गौ भक्त थे .राधा रानी सूर्य वंशी थीं. राम जी भी सूर्य वंशी थे. इनकी परम्परा इस प्रकार है. महाराज दिलीप तक तो एक ही वंश आता है. दिलीप ने गाय की भक्ति की क्योंकि उनको कामधेनु गाय का श्राप था.

ये जब एक बार स्वर्ग में गये थे तो जल्दी-जल्दी में गाय को प्रणाम करना भूल गए थे. कामधेनु ने श्राप दिया कि तुम पुत्र की इच्छा से जा रहे हो तुम्हें पुत्र नहीं होगा. ये श्राप उस समय दिलीप सुन नहीं सके थे क्योंकि आकाश में इंद्र का ऐरावत हाथी क्रीड़ा कर रहा था. दीघर्काल तक भी प्रयत्न करने पर उनको जब पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई तो गुरु वशिष्ठ के पास गए.

उन्होंने ध्यान करके बताया कि राजन तुम्हें तो श्राप है. तुम्हें पुत्र कभी हो ही नहीं सकता. ये अमोघ श्राप है कामधेनु गाय का वशिष्ट जी ने कहा कि तुम गाय सेवा करो. कामधेनु की लड़की हमारे पास है वो भी कामधेनु है. सिर्फ वही इस श्राप को नष्ट कर सकती है. दिलीप ने अद्भुत सेवा की .इनकी परीक्षा भी हुई. परीक्षा में सिंह ने आक्रमण किया और दिलीप ने अपना शरीर सिंह को दे दिया . सिंह बोला कि मैं पार्वती से नियुक्त सिंह हूँ, तुम इस साधारण गाय के लिए अपना शरीर क्यों नष्ट करते हो ? जीवित रहोगे तो अनेक तरह की तपस्या आदि कर सकोगे .

उन्होंने कहा कि ये शरीर जीवित रखने से कोई लाभ नहीं अगर हम गाय को नहीं बचा सकते. इससे तो मर जाना अच्छा है. मनुष्य को उतनी ही देर जीना चाहिए जब तक मशाल की तरह उस में प्रकाश हो. अगर प्रकाश न रहे तो जीने से कोई लाभ नहीं. उससे अच्छा है मर जाना. सिंह ने कहा तो फिर तैयार हो जाओ मरने के लिए. वो तैयार हो गए. सिंह आकाश में ऊपर उछला पर ये सिर नीचे करके बैठ गए. हिले नहीं कि सिंह हमारे ऊपर प्रहार करेगा. तब तक क्या देखते हैं कि एक फूलों की माला आकाश से उनके ऊपर आकर पड़ गयी.

उन्होंने सामने देखा तो गाय मुस्करा रही थी. बोली मैंने तुम्हारी परीक्षा ली थी. तुम इसमें पास हो गये हो. जाओ मेरी माँ का श्राप मिटता है. तुम्हारा पुत्र होगा बड़ा प्रतापी. उनका नाम रघु होगा. उस गौ सेवा को देख करके राजा दिलीप के लडकों में से जो धर्म नाम के सबसे छोटे लड़के थे उन्होंने कहा कि हमें राज्य नहीं चाहिए. हमें कुछ नहीं चाहिए हम तो सिर्फ गाय की सेवा करेंगे.

उसी वंश में आगे चलकर अभय कर्ण हुए. शत्रुघ्न जी जब ब्रज में आये तो अभय कर्ण को साथ लाये क्योंकि ये भी बड़े गाय भक्त थे. शत्रुघ्न जी जानते थे कि ये भूमि गाय के लायक है. जब अभय कर्ण जी यहाँ आये तो बड़े प्रसन्न हुए और गाय सेवा करने लग गए. इसीलिए रघुवंश का ये एक अलग वंश आता है. इन्हीं के वंश में रशंग जी हुए जिन्होंने बरसाना बसाया है और इन्हीं के वंश में राधा रानी होती हैं. ये बरसाने का इतिहास है. रशंग जी के वंश में ही राजा वृषभानु और राधा रानी हुई हैं. ये सूर्यवंशी थीं और श्री कृष्ण चंद्रवंशी थे.

प्रेम से बोलो राधे राधे
राधे राधेPosted at 23 Apr 2020 by admin
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