जो व्यक्ति कार्तिक मास में श्रीकेशव के निकट अखण्ड दीपदान करता है, वह दिव्य कान्ति से युक्त होकर .....
 
कार्तिक-मास में दीपदान का महत्व
जो व्यक्ति कार्तिक मास में श्रीकेशव के निकट अखण्ड दीपदान करता है, वह दिव्य कान्ति से युक्त होकर विष्णुलोक में विहार करता है।

एक ओर समस्त दान और दूसरी ओर कार्तिक मास में दीपदान बराबर नहीं होने के कारण दीपदान का ही अधिक महत्व है।

यहाँ तक कि जो लोग कार्तिक मास में श्रीहरि के मन्दिर में दूसरों के द्वारा रक्खे गये दीपों को प्रज्वलित करते हैं, उन्हें यम यातना भोग नहीं करनी पड़ती।

एक चूहे ने कार्तिक एकादशी में दूसरों के द्वारा रक्खे दीप को प्रज्वलित करके दुर्लभ मनुष्य जन्म लाभ किया था।

समुद्र सहित पृथ्वी दान और बछड़ों सहित दुग्धवती करोड़ों गायों के दान का फल विष्णु मंदिर के ऊपर शिखर दीपदान करने के सोलहवें अंश के एक अंश के बराबर भी नहीं है।
मूल्य ग्रहण करके भी शिखर या हरि मन्दिर में दीपदान करने से शत-कुल का उद्धार हो जाता है।

शिखर दीपदान की बात तो दूर जो व्यक्ति भक्ति सहित कार्तिक मास में केवल मात्र ज्योति -दीप्ति विष्णु मन्दिर के दर्शन करते हैं, उनके कुल में कोई नारकी नहीं होता।

देवगण भी विष्णु के गृह में दीपदान करने वाले मनुष्य के संग की कामना करते हैं।

कार्तिक-मास में, खेल खेल में ही सही विष्णु के मन्दिर को दीपों से आलोकित करने पर उसे धन, यश, कीर्ति लाभ होती है और सात कुल पवित्र हो जाते हैं।

मिट्टी के दीपक में घी / तिल तेल डालकर कार्तिक पूर्णिमा तक दीप प्रज्वलित करें। Posted at 23 Apr 2020 by admin
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