bhartiya sanskriti and hindu religion related devotional and inspiral contents for devotion like story, shri raamcharit manas, shrimad bhagwat geeta all in hindi language
 
भगवान का मित्र
भगवान का मित्र होना भी अत्यन्त दुर्लभ है। भगवान के साथ खेलना, भगवान से रूठना, फिर हृदय से लगाना, भगवान की बराबरी करना–यह तभी संभव है जब अपने को मिटाकर उनके सुख में सुखी रहने की लगन लगी रहे। उनके ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

धर्म क्या है?
जब युधिष्ठिर ने भीष्म पितामह से पूछा कि धर्म क्या है? तो उन्होंने उत्तर दिया था, जिससे अभ्युदय (लौकिक उन्नति) और नि:श्रेयस (पार लौकिक उन्नति-यानी मोक्ष) सिद्ध होते हों वही धर्म है। धर्म अधोगति म..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

गुरु
राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, कबीर, नानक इत्यादि अनेकानेक महापुरुष आपके सम्मानित पूर्वज रहे हैं। उनसे आप प्रेरणा लें और समकालीन किसी महापुरुष की प्राप्ति की लालसा रखें, क्रिया द्वारा चलकर आप भी ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

पात्रता
पात्रता के आभाव में सांसारिक जीवन में किसी को शायद ही कुछ विशेष उपलब्ध हो पाता हो। अपना सगा होते हुऐ भी एक पिता मूर्ख गैर जिम्मेदार पुत्र को अपनी विपुल संपत्ति नहीं सौंपता। कोई भी व्यक्ति निर..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

भक्ति
भक्ति जब भोजन में प्रवेश करती है, भोजन " प्रसाद "बन जाता है.। भक्ति जब भूख में प्रवेश करती है, भूख " व्रत " बन जाती है.। भक्ति जब पानी में प्रवेश करती है, पानी " चरणामृत " बन जाता है.। भक्त..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

लोग क्या कहेंगे ?
दुनिया में सबसे बड़ा रोग " क्या कहेंगे लोग " बहुत लोग अच्छा काम करने से इस डर से वंचित रह जाते हैं कि अगर सफल ना हुए तो लोग क्या कहेंगे ? इसी डर की वजह से वो कुछ अच्छा करने से, नये प्रयोगों से वंचित र..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

दीया तले अंधेरा (सूफी-कथा)
तिब्बत में एक बड़ी प्राचीन कहानी है। एक आदमी यात्रा से लौटा है– लंबी यात्रा से। अपने मित्र के घर ठहरा और उसने मित्र से कहा रात, यात्रा की चर्चा करते हुए, कि एक बहुत अनूठी चीज मेरे हाथ लग गई है। और ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

आध्यात्मिकता
'आध्यात्मिकता' शायद इस शब्द का अर्थ आजकल की युवा पीढ़ी को ज्ञात भी नहीं होगा। उनकी समझ से आध्यात्मिकता का अर्थ है मंदिर में बैठ कर भगवान के सामने भजन करना या कोई धर्म कांड। लेकिन सच्चाई इस से ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

परिवार
संत कबीर रोज सत्संग किया करते थे। दूर-दूर से लोग उनकी बात सुनने आते थे। एक दिन सत्संग खत्म होने पर भी एक आदमी बैठा ही रहा। कबीर ने इसका कारण पूछा तो वह बोला, ‘मुझे आपसे कुछ पूछना है। मैं गृहस्थ हू..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

भगवान के प्रति विशुद्ध अनन्य प्रेम
राधे राधे प्रेम का साधारण स्वरुप यह है—एक भगवान् के सिवा अन्य किसी में किसी समय भी आसक्ति न हो, प्रेम की मग्नता में भगवान् के सिवा अन्य किसी का ज्ञान ही न रहे। जहाँ-जहाँ मन जाय वहीं भगवान् दृष्ट..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

अपने जीवनसाथी में क्या क्या चाहती है एक लड़की
लड़कियां आखिर कैसा जीवन साथी चाहती है?इस सवाल का जवाब हर कोई तलाश रहा है. इस प्रश्न के ठीक ठीक जवाब की तलाश सिर्फ लड़कों को ही नहीं बहुत सी लड़कियों को भी है.। जब बहुत सी लड़कियों से पुछा कि उन्हें..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

श्रद्धा
पूजा हमारी श्रद्धा का प्रतिफल है। किसी में श्रद्धा होती है तो उसे पूजने का मन होता है।सगुण उपासक को पूजा के लिए एक 'स्वरूप' की आवश्यकता होती है। निरूगुण उपासना के लिए उपासक की श्रद्धा एक परम श..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

चाय के दो कप
एक प्रोफ़ेसर कक्षा में आये और उन्होंने छात्रों से कहा कि वे आज जीवन का एक महत्वपूर्ण पाठ पढाने वाले हैं ... उन्होंने अपने साथ लाई एक काँच की बडी बरनी ( जार ) टेबल पर रखा और उसमें टेबल टेनिस की गेंद..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

गीता में सगुण-निर्गुण उपासना
एवं सततयुक्ता ये भक्तास्त्वां पर्युपासते।ये चाप्यक्षरमव्यक्तं तेषां के योगवित्तमाः।।अर्जुन बोलेः 'जो अनन्यप्रेमी भक्तजन पूर्वोक्त प्रकार से निरन्तर आपके भजन-ध्यान में लगे रहकर आप सग..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

मनुष्य नास्तिक और कुतर्की क्यो होता है?
मनुष्य का स्वभाव है कि वो भगवान के बारे मे सबकुछ स्थूल रूपी 5 इंद्रियों से देखना चाहता है । लेकिन यह संभव नहीं है । जैसे आप आप इन आंखो से अणु या परमाणु को देख नहीं सकते है वैसे ही हम इस बुद्धि से भ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

महाभारत के कुछ अनमोल सबक
1- कभी किसी का अपमान मत करो।अपमान की आग बड़े-बड़े साम्राज्य नष्ट करदेती है। कभी किसी मनुष्यके व्यवसाय या नौकरी को छोटा मत समझो, उसे छोटा मतकहो।2- अगर मित्रता करो तो उसे जरूर निभाओ, लेकिन मित्र होन..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

अभिमान
महाभारत का युद्ध चल रहा था। अर्जुन के सारथी श्रीकृष्ण थे। जैसे ही अर्जुन का बाण छूटता, कर्ण का रथ दूर तक पीछे चला जाता। जब कर्ण का बाण छूटता, तो अर्जुन का रथ सात कदम पीछे चला जाता। श्रीक..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

अपेक्षाओं का कोई अन्त नहीं
रात के समय एक दुकानदार अपनी दुकान बन्द ही कर रहा था कि एक कुत्ता दुकान में आया । उसके मुॅंह में एक थैली थी। जिसमें सामान की लिस्ट और पैसे थे। दुकानदार ने पैसे लेकर सामान उस थैली में भर दिया। कुत..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

तीन कमियां
एक फकीर ने एक कुत्ते से पूछा कि तू है तो बहुत वफादार,, परन्तु तेरे में तीन कमियां हैं । 1-- तू पेशाब हमेशा दीवार पे ही करता है । 2-- तू भिखारी को देखकर बिना बात के ही भौंकता है । 3-- तू रात को भौंक भौं..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

सच्ची भेंट
एक बार एक अजनबी किसी के घरगया। वह अंदरगया और मेहमान कक्ष मे बैठ गया। वहखाली हाथआया था तो उसने सोचा कि कुछउपहार देना अच्छा रहेगा।तोउसने वहा टंगी एक पेन्टिंग उतारीऔर जब घर का मालिकआया, उसने पे..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

अंधा प्रेम
अर्जुन ने एक रात को स्वप्न में देखा की एक गाय अपने नवजात बछड़े को प्रेम से चाट रही है। चाटते चाटते वह गाय उस बछड़े की कोमल खाल को छील देती है। उसके शरीर से रक्त निकलने लगता है और वह बेहोश होकर नीचे ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

हम जैसा चाहते हैं, वैसे ही भगवान् हमें मिलते हैं।
दो भक्त थे। एक भगवान् श्रीराम का भक्त था, दूसरा भगवान् श्रीकृष्ण का। दोनों अपने-अपने भगवान् (इष्टदेव)-को श्रेष्ठ बतलाते थे। एक बार वे जंगलमें गये। वहाँ दोनों भक्त अपने-अपने भगवान्‌को पुकारने ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

परमात्मा का धन्यवाद कहो
एक भक्त था वह परमात्मा को बहुत मानता था, बड़े प्रेम और भाव से उनकी सेवाकिया करता था ।एक दिन भगवान से कहने लगा – मैं आपकी इतनी भक्ति करता हूँ पर आज तक मुझे आपकी अनुभूति नहीं हुई ।मैं चाहता हूँ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

संतुष्टी
चाणक्य के एक दोहे से समझा जा सकता है कि मनुष्य को किन चीजों से संतोष रखना चाहिए और किन चीजों से कभी भी संतुष्ट नहीं होना चाहिए- तीन ठौर संतोष कर, तिय भोजन धन माहिं। दानन में अध्ययन में, जप में कीज..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

कर्मों का फल कब, कैसा, कितना मिलता है?
यह जिज्ञासा सभी धार्मिक व्यक्तियों के मन में होती है।कर्मफल देने का कार्य मुख्य रूप से ईश्वर द्वारा संचालित और नियन्त्रित है, वही इसके पूरे विधान को जानता है, मनुष्य इस विधान को कम अंशों में..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

रामायण कथा का एक अंश, जिससे हमे सीख मिलती है "एहसास" की
श्री राम, लक्ष्मण एवम् सीता' मैया चित्रकूट पर्वत की ओर जा रहे थे,राह बहुत पथरीली और कंटीली थी !की यकायक श्री राम के चरणों मे कांटा चुभ गया !श्रीराम रूष्ट या क्रोधित नहीं हुए, बल्कि हाथ जोड़कर ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

मंत्र क्या है?
मंत्र परमात्मा का नाम है, वाचक है, सम्बोधन है, नाम-जप से मिलनेवाली स्थिति है।परमात्मा का बोध करानेवाले किसी दो-ढाई अक्षर के नाम को चार श्रेणियों से जपा जाता है, आरम्भ बैखरी से है, इससे उन्नत क्..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

सबसे बड़ा ज्ञान
हम खुद चाहे कितना ही झूठ बोल लें पर कोई दूसरा बोल दे तो हमे बर्दाश्त नहीं होता। हम दूसरों पर कितना भी गुस्सा कर लें पर जब कोई हम पर गुस्सा करता है तब हमे बड़ा बुरा लगता है। जबकी हमें स्वयं के प्रति..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

भक्ति का दिखावा
जिनको काम प्रिय है वे प्रभु की कथा को नही सुन सकते और जिनको श्याम प्रिय है वे अपना सारा काम छोड़कर प्रभु की कथा सुनने के लिए पहुँचते हैं।मानव जीवन का एक सच है और उस सच का नाम है मृत्यु।जब हमें प..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

हमारा क्या है?
एक बार एक आदमी मर जाता है...जब उसे इसका एहसास होता है तो वो देखता है की भगवान हाथ में एक सूटकेस लिए उसकी तरफ आ रहें हैं।भगवान और उस मृत व्यक्ति के बीच वार्तालाप .....भगवान : चलो बच्चे वापिस जान..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

संसार की वास्तविकता
पुराने जमाने में एक राजा हुए थे,भर्तृहरि। वे कवि भी थे।उनकी पत्नी अत्यंत रूपवती थीं।भर्तृहरि ने स्त्री के सौंदर्य औरउसके बिना जीवन के सूनेपन पर 100श्लोक लिखे, जो श्रृंगार शतक के नामसे प्रसिद्..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

लालसा और परोपकार
लालसा कष्ट का कारण बनती है, परोपकार के बदले उपकार के भाव से अभिमान आता हैएक आदमी को जीवन से बड़ी ख्वाहिशें थीं। उसने उन्हें पूरी करने की कोशिश भी की लेकिन सफल नहीं रहा। किसी सत्संगी के संपर्क ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

कर्म का खाता
पूर्व जन्म के कर्मों से ही हमें इस जन्म मेंमाता-पिता, भाई बहिन, पति-पत्नि, प्रेमिका, मित्र-शत्रु, सगे-सम्बंधी इत्यादि संसार के जितने भी रिश्ते नाते है, सब मिलते है।क्योंकि इन सबको हमें या तो कु..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

दांपत्य सुख
यदि चाहते हुए वैवाहिक सुख नहीं मिल पा रहा है, हमेशा पति-पत्नि में किसी बात को लेकर अनबन रहती हो तो किसी भी शुक्रवार के दिन यह उपाय करें। मिट्टी का पात्र ले जिसमें सवा किलो मशरूम आ जाएं। मशरूम डा..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

कर्मों का फल
जीव कर्म करने में तो स्वतंत्र है परन्तु फल भोगने में परतंत्र क्यों? जीवात्मा अपने कर्मों का फल भोगने में परतन्त्र है इसका कारण है, प्रथम- जीवात्मा स्वयं कर्मों का फल ले नहीं सकता क्योंकि उसका ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

भक्ति योग का महत्व
भक्ति योग में अर्जुन ने पूछा, ‘जो भक्त आपके प्रेम में डूबे रहकर आपके सगुण रूप की पूजा करते हैं, या फिर जो शाश्वत, अविनाशी और निराकार की पूजा करते हैं, इन दोनों में से कौन अधिक श्रेष्ठ है। भगवान ..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

भारतीय समाज (संस्कार और परंपराए)
भारतीय समाज मर्यादाओं में जीने वाला संसार का सबसे श्रेष्ठ समुदाय है, जो जन्म से लेकर मृत्यु तक संस्कारों और परंपराओं में बंधा हुआ है। यही हमारी पहचान और खूबी है, यही हमारा सबसे बड़ा आभूषण है..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

गाय विश्व की माता है
उस समय ऋषि-मुनियों को राक्षस लोग खा जाया करते थे और आजकल के मनुष्य ही राक्षस है, वे गायों को खाकर चारों ओर हडियों के ढेरी लगा रहे है। संसार में जब जायदा अत्याचार होता है तब भगवान के बहुत-से जो भक्..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

ये 10 बातें बताती हैं आपका व्यक्तित्व
किसी भी व्यक्ति का किसी अन्य व्यक्ति से बात करने का तरीका और उसके हंसने का तरीका उस व्यक्ति के व्यक्तित्व को दर्शाता है। समुद्रशास्त्र में इस बारे में काफी कुछ उल्लेख किया गया है। आधुनिक युग ..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

मनुष्यता (मानवता)
मनुष्य के व्यक्तिगत जीवन एवं मानव समाज में सुख-शाँति की परिस्थितियां किस आधार पर बनेंगी यदि इस प्रश्न का संक्षिप्त सा उत्तर दिया जाये, तो वह होगा मनुष्य में मनुष्यता विकास से। इसी को प्रका..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

माता ममत्व एवं पिता अनुशासन के प्रत्यक्ष देवता होते है
इसलिए उपनिषदों में 'मातृ देवो भव, पितृ देवो भव' की बात कहके मंत्र दृष्टा ऋषि-मुनि, पुत्र को कर्तव्य बोध का उपदेश देते हुए माता-पिता को प्रत्यक्ष देवता मानकर उनकी सेवा भक्ति करने का आदेश देते हैं..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

मौन
योग कहता है कि मौन ध्यान की ऊर्जा है और सत्य का द्वार है।मौन से आप खुद से अच्छे तरीके से जुड़ सकते हैं, लेकिन इसके लिए आपके अपने बीच खड़ी मन-विचारों की दीवार को हटाकर 'मौन' को रखना होगा। मौन से म..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

अस्तित्व, ज्ञान और आनंद
यदि मनुष्य नश्वर हैं तो हम अनंत अस्तित्व, ज्ञान और आनंद की इच्छा क्यों रखते हैं? अस्तित्व, ज्ञान और आनंद की विशेषताओं से रहित मनुष्य, अनंतकाल तक पूर्ण ज्ञान और पूर्ण आनंद प्राप्त करने के लिए, ..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

तीन दुर्लभ चीजें
पाताललोक, मृत्युलोक और स्वर्गलोक-इन तीनों लोकों में सदगुरु, सत्संगति और ब्रह्मविचार की प्राप्ति दुर्लभ है। ये तीन चीजें जिसे मिल गयीं, चाहे उसे और कुछ नहीं मिला, फिर भी वह सबसे ज्यादा भाग्यवा..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

होंठ के निम्न भेद होते हैं
1- संकुचित होंठ- ऐसे होंठ छोटे व पतले होते हैं इनमें कोई रंग नहीं होता। ऐसे जातक दिखावटी, अक्षम होते हैं इनकी बोलने की क्षमता भी अपेक्षाकृत कम होती है। 2- मोटे होंठ- अधिक थुलथुले, मांस से भरपूर हो..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

आत्मसम्मान
आत्मसम्मान एक सफल सुखी जीवन का आधारभूत तत्व है। व्यक्ति आत्मसम्मान के अभाव में सफल तो हो सकता है, बाह्य उपलब्धियों भरा जीवन भी सकता है, किंतु वह अंदर से भी सुखी, संतुष्ट और संतृप्त होगा, यह संभ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

भक्ती
प्रभु के साथ हमारा व्यवहार वैसा ही होना चाहिए जैसा स्त्री का अपने पति के साथ। जैसे स्त्री अपने प्रेम और हावभाव से पति को मोहित कर लेती है, वैसे ही हमें भगवान् को अपने प्रेम और आचरण से मोहित कर ल..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

शिष्टाचारः एक परिचय
शिष्टाचार दर्पण के समान है, जिसमें मनुष्य अपना प्रतिबिंब देखता है। शिष्टाचार मनुष्य के व्यक्तित्व का दर्पण होता है। शिष्टाचार ही मनुष्य की एक अलग पहचान करवाता है। जिस मनुष्य में शिष्टाचार ..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

त्रिया-चरित्रम्
''त्रिया-चरित्रम्'' अर्थात तीन प्रकार के चरित्र ! १ - सात्विक, २- राजसिक , ३- तामसिक ! ब्रह्माण्ड का सञ्चालन सुचारु रूप से चलाने के लिये उन्होंने तीन प्राकृतिक गुणों की रचना की जो सत्व, राजस ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

देवताओं की पूजा की उपेक्षा मात्र कृष्ण ही पूजनीय क्यों हैं?
अधिकांश लोग इस भौतिक जगत् से इतना अधिक आसक्त हैं कि उन्हें उन सुखों को प्राप्त करने के अतिरिक्त कुछ और नहीं चाहिए। और वे इन सुखों को शीघ्र से शीघ्र प्राप्त करने हेतु कुछ भी कर सकते हैं। उनकी स्..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

रामायण के सात काण्ड मानव की उन्नति के सात सोपान-
ॐ राम राम जी ॐॐ जय सिया राम ॐ रामचरित मानस एहि नामा। सुनत श्रवण पाहिह विश्रामा।। * मन कामना सिद्धि नर पावा। जे यह कथा कपट तजि गावा॥कहहिं सुनहिं अनुमोदन करहीं। ते गोपद इव भवनिधि तरहीं॥..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

सच्ची प्रसन्नता का सूत्र
वे सत्पुरुष हैं जो अपने सुख की परवाह किए बिना सदैव दूसरों को सुख पहुंचाने के लिए प्रयत्नशील रहते हैं। वास्तव में, इस श्रेणी के लोग दूसरों को अपने से भिन्न मानते ही नहीं हैं, इसलिए दूसरों को मि..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

संवाद
व्यावहारिक व सामाजिक जीवन में आपसी संवाद का महत्व निर्विवाद है। निजी जीवन में सफलता हासिल करने का एक गुण संवाद कला में पारंगत होना है, संवाद गुरुत्वाकर्षण है। सात्विक आंखों से दृष्टि मिलान..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

संस्कार
गाँव के कुएँ पर 3 महिलाएँ पानी भर रही थीं। तभी एक महिला का बेटा वहाँ से गुजरा। उसकी माँ बोली---" वो देखो, मेरा बेटा, इंग्लिश मीडियम में है। " थोड़ी देर बाद दूसरी महिला का पुत्र गुजरा। उसक..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

दस बोरी अखरोट
एक गिलहरी रोज अपने काम पर समय से आती थी और अपना काम पूर्ण मेहनत तथा ईमानदारी से करती थी ! गिलहरी जरुरत से ज्यादा काम कर के भी खूब खुश थी क्यों कि उसके मालिक ....... जंगल के राजा शेर नें उसे दस बोरी अख..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

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