राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, कबीर, नानक इत्यादि अनेकानेक महापुरुष आपके सम्मानित पूर्वज रहे हैं। उ.....
 
गुरु
राम, कृष्ण, बुद्ध, महावीर, कबीर, नानक इत्यादि अनेकानेक महापुरुष आपके सम्मानित पूर्वज रहे हैं। उनसे आप प्रेरणा लें और समकालीन किसी महापुरुष की प्राप्ति की लालसा रखें, क्रिया द्वारा चलकर आप भी वैसा ही बनें। आप केवल एक परमात्मा में श्रद्धावान होकर उसके किसी नाम को जपने के लिए कुछ समय दें। पुण्य-पुरुषार्थ घनीभूत होते ही आपके लिए जो भी संत या सद्गुरु निर्धारित होंगे, स्वतः मिल जायेंगे। यदि पुण्य-पुरुषार्थ उस स्तर का अभी नहीं है, कोई महापुरुष आप पर थोप दिया जाय तो इससे भी आपको कोई लाभ नहीं। इससे थोपनेवालों का स्वार्थ भले ही सिद्ध हो किन्तु जिस बेचारे पर थोपा गया है उसे रूढ़ि के अतिरिक्त कुछ भी मिलनेवाला नहीं है। अतः इस दुराग्रह का भी कोई औचित्य नहीं है कि केवल मेरे महापुरुष को मानो। हमारे पूर्व मनीषियों ने यही किया। उन्होंने केवल नास्तिकता को आस्तिकता में बदला। किसी पर रहन-सहन या खान-पान का नियम नहीं लादा। खान-पान का नियम नहीं लादा। खान-पान, पहनावा, भाषा इत्यादि आपको अलगाते हैं, जबकि धर्म आप सबकी आत्मिक एकता की प्रत्यक्ष अनुभूति कराता है, वह आपको एक करता है। वह बताता है कि किस बिन्दु पर आप एक हैं। अनेकताओं के बीच निहित आत्मिक एकता की दृष्टि देता है धर्म। कितना विरोधाभास है लोग बँटे हैं, लड़ रहे हैं- वह भी धर्म के नाम पर, महापुरुषों के नाम पर। समृद्धि और अपने अहं की संतुष्टि के लिए लोग लड़ते ही रहते हैं, आप शौक से लड़िए; किन्तु कोई स्थान नहीं है धर्म के नाम पर लड़ने का। मानवमात्र के लिए एक धर्म का सन्देश लेकर हमारे पूर्वज चीन जापान से लेकर मिस्र तक गये। अमेरिका में भी उनके प्राचीन स्मृति-चिह्न मिल रहे हैं। दक्षिण-पूर्वी एशिया को तो लोग बृहत्तर भारत ही कहने लगे थे।समूचे विश्व ने उनकी शिक्षाओं को हाथो-हाथ लेकर उनके धर्म-विजय में सहयोग दिया और जिस भी व्यक्ति ने धर्म के नाम पर समाज में फूट डालने की कोशिश की उसे उन्होंने भयंकर चेतावनी दी।Posted at 15 Nov 2018 by admin
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