भक्ति जब भोजन में प्रवेश करती है, भोजन " प्रसाद "बन जाता है.। भक्ति जब भूख में प्रवेश करती है, .....
 
भक्ति
भक्ति जब भोजन में प्रवेश करती है, भोजन " प्रसाद "बन जाता है.। भक्ति जब भूख में प्रवेश करती है, भूख " व्रत " बन जाती है.। भक्ति जब पानी में प्रवेश करती है, पानी " चरणामृत " बन जाता है.। भक्ति जब सफर में प्रवेश करती है, सफर " तीर्थयात्रा " बन जाता है.। भक्ति जब संगीत में प्रवेश करती है, संगीत " कीर्तन " बन जाता है.। भक्ति जब घर में प्रवेश करती है, घर " मन्दिर " बन जाता है.। भक्ति जब कार्य में प्रवेश करती है, कार्य " कर्म " बन जाता है.। भक्ति जब क्रिया में प्रवेश करती है, क्रिया "सेवा " बन जाती है.। और... भक्ति जब व्यक्ति में प्रवेश करती है, व्यक्ति " मानव " बन जाता है..।Posted at 23 Apr 2020 by admin
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