हम खुद चाहे कितना ही झूठ बोल लें पर कोई दूसरा बोल दे तो हमे बर्दाश्त नहीं होता। हम दूसरों पर कितन.....
 
सबसे बड़ा ज्ञान
हम खुद चाहे कितना ही झूठ बोल लें पर कोई दूसरा बोल दे तो हमे बर्दाश्त नहीं होता। हम दूसरों पर कितना भी गुस्सा कर लें पर जब कोई हम पर गुस्सा करता है तब हमे बड़ा बुरा लगता है। जबकी हमें स्वयं के प्रति कठोर और दूसरों के प्रति सरल होना चाहिए।
ब्रह्मा जी की सृष्टि में पूर्ण तो कोई भी नहीं है। यहाँ सबमें कुछ ना कुछ कमीं हैं। सबकी सोच, सबके बिचार, सबके उद्देश्य, सबके कार्य करने का तरीका अलग- अलग है। अगर सारी दुनिया एक जैसी होती तो इसके दो ही परिणाम होते, या तो दुनिया स्वर्ग होती या नरक। विविधता ही इस दुनिया को खूबसूरत बनाती है।
ज्ञानी ऐसी चेष्टाओं से मुक्त होता है। वह किसी पर अपना आधिपत्य ज़माने की कोशिश नहीं करता, ना ही वह किसी से टकराता है। लोग जैसे हैं उन्हें वैसे ही स्वीकार कर लेना ही सबसे बड़ा ज्ञान है। बुद्ध कहते है कि सत्य का पालन स्वयं करना तो धर्म है पर दूसरों से जबरदस्ती सत्य का पालन कराना हिंसा है।Posted at 23 Apr 2020 by admin
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