जिनको काम प्रिय है वे प्रभु की कथा को नही सुन सकते और जिनको श्याम प्रिय है वे अपना सारा काम छोड़कर .....
 
भक्ति का दिखावा
जिनको काम प्रिय है वे प्रभु की कथा को नही सुन सकते और जिनको श्याम प्रिय है वे अपना सारा काम छोड़कर प्रभु की कथा सुनने के लिए पहुँचते हैं।

मानव जीवन का एक सच है और उस सच का नाम है मृत्यु।
जब हमें पता है की हमारी मृत्यु निश्चित है हम खाली हाथ आये थे और खाली हाथ ही जायेंगे तो क्यों न हम इस जीवन को धर्म के कार्यों में लगायें।
ताकि मरने के बाद जब हम ऊपर जाएँ तो प्रभु हमें पहचान सकें।

हमें भगवान की भक्ति बिना कोई दिखावा किए करनी चाहिए क्योंकि जब पूतना अपना रूप बदलकर कृष्ण भगवान को मारने आई तो प्रभु ने अपनी आँखें बंद कर ली थी उसी प्रकार जब हम किसी भी प्रकार का दिखावा करके भगवान की वंदना करते हैं तो भगवान हमारी वंदना को स्वीकार नहीं करते।

अगर हम सच्ची श्रद्धा और बिना कोई दिखावा किए प्रभु की भक्ति करते हैं तो प्रभु हमें अपनी छ्त्रछाया में लेकर हमारे जीवन के साथ-साथ हमारी मृत्यु को भी सवांर देते है।

जब ब्रजवासियों ने इंद्र की पूजा छोड़कर गिर्राज जी की पूजा शुरू कर दी तो इंद्र ने कुपित होकर ब्रजवासियों पर मुसलाधार बारिश की तब कृष्ण भगवान ने गिर्राज को अपनी कनिष्ठ अंगुली पर उठाकर ब्रजवासियों की रक्षा की और इंद्र का मान मर्दन किया।
तब इंद्र को भगवान की सत्ता का अहसास हुआ और इंद्र ने भगवान से क्षमा मांगी व कहा हे प्रभु मैं भूल गया था की मेरे पास जो कुछ भी है वो सब कुछ आप का ही दिया हुआ है

इससे हमें यह सीख मिलती है कि आज हमारे पास जो कुछ भी है वो सब कुछ हमें भगवान का ही दिया हुआ है उस पर हमें अभिमान नहीं बल्कि भगवान का प्रसाद समझकर स्वीकार करना चहिए।

"कलयुग महि एक पुन्य प्रतापा - मानस पुन्य होय नहीं पापा" अथार्त कलयुग में किया हुआ मानसिक पुन्य तो लगता है पर पाप नहीं लगता।


हरे कृष्णः हरे कृष्ण:
कृष्ण: कृष्ण: हरे हरे।।
हरे राम हरे राम
राम राम हरे हरे।।Posted at 23 Apr 2020 by admin
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