व्यावहारिक व सामाजिक जीवन में आपसी संवाद का महत्व निर्विवाद है। निजी जीवन में सफलता हासिल करन.....
 
संवाद
व्यावहारिक व सामाजिक जीवन में आपसी संवाद का महत्व निर्विवाद है। निजी जीवन में सफलता हासिल करने का एक गुण संवाद कला में पारंगत होना है, संवाद गुरुत्वाकर्षण है। सात्विक आंखों से दृष्टि मिलाने में दिव्यता प्रथम सोपान है, संवाद करने में आंखें निरंतर अपलक निहारती हैं, संवादहीनता संदेह की खाई है। वह बढ़ती ही जाती है, इसे पाटने के लिए किसी बड़े से बड़े को छोटा बनना पड़ता है, झुकने वाला बड़ा हो जाता है, बड़े का झुकना क्षमादान का ही दूसरा नाम है। सच तो यह है कि संबंध का सूत्रपात संवाद से होता है, संवाद सुख-दु:ख की पड़ताल करके उचित मार्गदर्शन करता है, संवाद की सार्थकता के लिए एक व्यक्ति को कुछ झुकना पड़ता है, जिसे देखकर सामने वाले के मन में भी विनम्रता स्वाभविक रूप से आ जाती है। संवादहीनता अकारण बढ़ती है, कभी-कभी यह प्रतिशोध की आग लगाती है, कारण के बगैर कार्य होना मूढ़ता की श्रेणी में गिना जाता है, क्रिया के बाद उसकी प्रतिक्रिया सामान्य बात है, सहनशीलता कहीं-कहीं दिखाई पड़ती है। संवादहीनता के कारण कोई भी मुद्दा तिल का ताड़ बन सकता है, संवादहीनता बढ़ाने वाले से स्वाभिमानी बचने का प्रयास करते हैं। स्वाभिमानी का संकोच अद्भुत होने के कारण संवादहीनता करने वाले मनमानी करते हैं, अदूरदर्शिता संवाद घटाती है, संवादहीनता परस्पर दोष खोजने के लिए विवश करती है, जबकि संवाद दोषमुक्त रखता है। संवाद यथार्थ से मुंह न चुराकर वास्तविकता का ज्ञान कराता है, संघर्ष करने पर समस्या का निदान निकलता है। संवादहीनता पीठ दिखाकर सत्य से दूर करती है, अपनी बात दूसरे पर लादकर दूसरे की बात न सुनने का भ्रम पालती है। व्यक्ति से लेकर विभिन्न् समाज सुधारक समितियों और संगठनों के बीच संघर्ष की जो स्थिति है, उसका एक प्रमुख बुनियादी कारण संवादहीनता ही है। अगर संवाद कायम किया जाए तो व्यक्ति और राष्ट्रों के मध्य मतभेद खत्म हो सकते हैं, हमें संवादहीनता की स्थिति को खत्म कर पारस्परिक संवाद कायम करना चाहिए। संवाद की पहल से कोई छोटा नहीं हो जाता, बल्कि यह तो एक तरह से बड़प्पन की निशानी होती है।Posted at 15 Nov 2018 by admin
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