read full Shri ShivMahaaPuran kathaa vidhyeshvar sanhitaa in hindi meaning, created by mahaamuni vyaasdevji
 











विषय सूची :
1) विद्येश्वरसंहिता:-
 
श्रीशिवमहापुराण-विद्येश्वरसंहिता-पहला अध्याय
प्रयाग में सुतजी से मुनियों का तुरंत पापनाश करने वाले साधन के विषय में प्रश्न
 
 
श्रीशिवमहापुराण-तिसरा अध्याय
साध्य-साधन आदि का विचार
 
श्रीशिवमहापुराण-चौथा अध्याय
श्रवण, कीर्तन और मनन- इन तीन साधनों की श्रेष्ठता का प्रतिपादन
 
श्रीशिवमहापुराण-पाँचवा अध्याय
भगवान शिव के लिग्ङ एवं साकार विग्रह की पूजा के रहस्य तथा महत्व का वर्णन
 
श्रीशिवमहापुराण-छटा अध्याय
शिव लिग्ङ कि उत्तपत्ति कि कथा (ब्रह्मा-विष्णु मे वीवाद तथा देवतागण का भगवान शिव के पास जाकर विनती करना)
 
श्रीशिवमहापुराण- सातवाँ अध्याय
शिव लिग्ङ कि उत्तपत्ति कि कथा (ब्रह्मा-वीष्णु के मध्य शिव लिग्ङ का प्रकट होना तथा ब्रह्मा-वीष्णु का शिव लिग्ङ की थाह पाने हेतु प्रयास)
 
श्रीशिवमहापुराण- आठवाँ अध्याय
शिव लिग्ङ कि उत्तपत्ति कि कथा (भैरवजी द्वारा ब्रह्माजी का पाँचवा सिर काटना एवं केतकी पुष्प को शिवजी का शाप)
 
श्रीशिवमहापुराण- नवाँ अध्याय
महेश्वर का ब्रह्मा और विष्णु को अपने निष्कल और सकल स्वरुप का परिचय देते हुए लिग्ड़ पूजन का महत्व बताना
 
श्रीशिवमहापुराण- दसवाँ अध्याय
पाँच कृत्यों का प्रतिपादन, प्रणव एवं पञ्चाक्षर-मन्त्र की महत्ता, ब्रह्मा-विष्णु द्वारा भगवान शिव की स्तुति तथा उनका अन्तर्धान
 
श्रीशिवमहापुराण- ग्यारहवाँ अध्याय
शिव-लिग्ड़ की स्थापना, उसके लक्षण और पूजन की विधि का वर्णन तथा शिव-पद की प्राप्ति कराने वाले सत्कर्मों का विवेचन
 
श्रीशिवमहापुराण- बारहवाँ अध्याय
मोक्षदायक पुण्यक्षेत्रों का वर्णन, कालविशेष मे विभिन्न नदियों के जल मे स्नान के उत्तम फल का निर्देश तथा तीर्थों मे पाप से बचे रहने की चेतावनी
 
श्रीशिवमहापुराण- तेरहवाँ अध्याय
सदाचार, शौचाचार, स्नान, भस्मधारण, संध्या-वंदन, प्रणव-जप, गायत्री-जप, दान, न्यायतः धनोपार्जन तथा अग्निहोत्र आदि की विधि एवं महिमा का वर्णन
 
श्रीशिवमहापुराण- चौदहवाँ अध्याय
अग्नियज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ आदि का वर्णन, भगवान शिव के द्वारा सातों वारों का निर्माण तथा उनमें देवाराधना से विभिन्न प्रकार के फलों की प्राप्ति का कथन
 
श्रीशिवमहापुराण- पंद्रहवाँ अध्याय
देश, काल, पात्र और दान आदि का विचार
 
श्रीशिवमहापुराण- सोलहवाँ अध्याय
पृथ्वी आदि से निर्मित देवप्रतिमाओं के पूजन की विधि, उनके लिये नैदेद्य का विचार, पूजन के विभिन्न उपचारों का फल, विशेष मास, वार, तिथि एवं नक्षत्रों के योग में पूजन का विशेष फल तथा लिग्ड़ के वैज्ञानिक स्वरुप का विवेचन
 
श्रीशिवमहापुराण- सत्रहवाँ अध्याय
षड्​लिग्ङ्स्वरुप प्रणव तथा उसके सुक्ष्म-रुप (ॐकार) और स्थुल-रुप (पञ्चाक्षर-मन्त्र) का विवेचन, उसके जप की विधि एवं महिमा तथा शिव-भक्तों के सत्कार की महत्ता
 
श्रीशिवमहापुराण- अठारहवाँ अध्याय
शिव लिग्ड़ की महिमा का वर्णन
 
श्रीशिवमहापुराण- उन्निसवाँ अध्याय
पार्थिव-लिग्ड़ के निर्माण की रीति तथा पूजन का माहात्म्य
 
श्रीशिवमहापुराण- बीसवाँ अध्याय
वेद-मन्त्रों द्वारा पार्थिव-लिग्ड़ पूजन की विस्तृत एवं संक्षिप्त विधि का वर्णन
 
श्रीशिवमहापुराण- ईक्कीसवाँ अध्याय
पार्थिव पुजा की महिमा का वर्णन
 
श्रीशिवमहापुराण- बाईसवाँ अध्याय
शिव-नैवेद्य भक्षण के विषय में निर्णय तथा बिल्व का माहात्म्य
 
श्रीशिवमहापुराण- तेईसवाँ अध्याय
शिव-नाम जप की महिमा का वर्णन
 
श्रीशिवमहापुराण- चौइसवाँ अध्याय
भस्मधारण की महिमा, त्रिपुण्ड्र के देवता और स्थान आदि का प्रतिपादन
 
श्रीशिवमहापुराण- पच्चिसवाँ अध्याय
रुद्राक्ष-धारण की महिमा तथा उसके विविध भेदों का वर्णन