ShivPuraan in hindi kathaa chepter 14 (श्रीशिवमहापुराण- चौदहवाँ अध्याय: अग्नियज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ आदि का वर्णन, भगवान शिव के द्वारा सातों वारों का निर्माण तथा उनमें देवाराधना से विभिन्न प्रकार के फलों की प्राप्ति का कथन), page:4
 
। । ॐ नमः शिवाय । ।

श्रीशिवमहापुराण-विद्येश्वरसंहिता: चौदहवाँ अध्याय

अग्नियज्ञ, देवयज्ञ और ब्रह्मयज्ञ आदि का वर्णन, भगवान शिव के द्वारा सातों वारों का निर्माण तथा उनमें देवाराधना से विभिन्न प्रकार के फलों की प्राप्ति का कथन : पृष्ठ 4


सौम्यवारे तथा विष्णुं दध्यन्नेन यजेद्बुधः।
पुत्रमित्रकलत्रादिपुष्टिर्भवति सर्वदा॥३१॥
बुधवार को विद्वान पुरुष दधियुक्त अन्न से भगवान विष्णु का पूजन करें। ऐसा करने से सदा पुत्र, मित्र और कलत्र आदि की पुष्टि होति है।
आयुष्कामो गुरोर्वारे देवानां पुष्टिसिद्धये।
उपवीतेन वस्त्रेण क्षीराज्येन यजेद्बुधः॥३२॥
जो दिर्घायु होने की इच्छा रखता हो, वह गुरुवार को देवताओं की पुष्टि के लिये वस्त्र यज्ञोपवित तथा घृतमिश्रित खीर से यजन-पूजन करें।
भोगार्थं भृगवारे तु यजेद्देवान्समाहितः।
षड्रसोपेतमन्नं च दद्याद्ब्राह्मणतृप्तये॥३३॥
भोगो की प्राप्ति के लिये शुक्रवार को एकाग्रचित्त होकर देवताओं का पूजन करें। और ब्राह्मणों कि तृप्ति के लिये षड़्-रस-युक्त अन्न दें।
स्त्रीणां च तृप्तये तद्वद्देयं वस्त्रादिकं शुभम्।
अपमृत्युहरे मंदे रुद्राद्रींश्च यजेद्बुधः॥३४॥
इसी प्रकार स्त्रियों की प्रसन्नता के लिये सुन्दर वस्त्र आदि का विधान करें। शनैश्चर अपमृत्यु का निवारण करने वाला है। उस दिन बुद्धिमान पुरुष रुद्र आदि की पूजा करें।
तिलहोमेन दानेन तिलान्नेन च भोजयेत्।
इत्थं यजेच्च विबुधानारोग्यादिफलं लभेत्॥३५॥
तिल के होम से, दान से देवताओं को सन्तुष्ट करके ब्राह्मणों को तिल-मिश्रित अन्न का भोजन करायें। जो एस तरह देवताओं की पूजा करेगा, वह आरोग्य आदि फल का भागी होगा।
देवानां नित्ययजने विशेषयजनेपि च।
स्नाने दाने जपे होमे ब्राह्मणानां च तर्पणे॥३६॥
तिथिनक्षत्रयोगे च तत्तद्देवप्रपूजने।
आदिवारादिवारेषु सर्वज्ञो जगदीश्वरः॥३७॥
देवताओं के नित्य-पूजन, विशेष-पूजन, स्नान, दान जप, होम तथा ब्राह्मण-तर्पण आदि मे एवं रवि आदि वारों मे विशेष तिथि और नक्षत्रों का योग प्राप्त होने पर विभिन्न देवताओं के पूजन मे सर्वज्ञ जगदिश्वर भगवान शिव ही उन-उन देवताओं के रुप मे पूजित हो सब लोगों को आरोग्य आदि फल प्रदान करते है।
ततद्रूपेण सर्वेषामारोग्यादिफलप्रदः।
देशकालानुसारेण तथा पात्रानुसारतः॥३८॥
देश, काल, पात्र, द्रव्य, श्रद्धा एवं लोक के अनुसार उनके तारतम्य क्रम का ध्यान रखते हुए महादेवजी आराधना करने वाले लोगों को आरोग्य आदि फल देते है।
द्रव्यश्रद्धानुसारेण तथा लोकानुसारतः।
तारतम्यक्रमाद्देवस्त्वारोग्यादीन्प्रयच्छति॥३९॥
शुभादावशुभांते च जन्मर्क्षेषु गृहे गृही।
आरोग्यादिसमृद्ध्यर्थमादित्यादीन्ग्रहान्यजेत्॥४०॥
शुभ (माङ्लिक कार्य) के आरम्भ मे और अशुभ (अन्त्येष्टि आदि कर्म) के अन्त मे तथा जन्म-नक्षत्रों के आने पर गृहस्थ पुरुष अपने घर मे आरोग्य आदि की समृद्धि के लिये सूर्य आदि ग्रहों का पूजन करे।
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