ShivPuraan in hindi kathaa chepter 15 (श्रीशिवमहापुराण- पंद्रहवाँ अध्याय: देश, काल, पात्र और दान आदि का विचार), page:3
 
। । ॐ नमः शिवाय । ।

श्रीशिवमहापुराण-विद्येश्वरसंहिता: पंद्रहवाँ अध्याय

देश, काल, पात्र और दान आदि का विचार : पृष्ठ 3


इच्छावतः प्रदानं च संपूर्णफलदं विदुः।
यत्प्रश्नानंतरं दत्तं तदर्थफलदं विदुः॥२१॥ यत्सेवकाय दत्तं स्यात्तत्पादफलदं विदुः।
जातिमात्रस्य विप्रस्य दीनवृत्तेर्द्विजर्षभाः॥२२॥
जिसको जिस वस्तु की इच्छा हो, उसे वह बिना माँगे ही दे दी जाय तो दाता को उस दान का पूरा-पूरा फल प्राप्त होता है, ऐसी महर्षियों की मान्यता है। जो सवाल या याचना करने के बाद दिया गया हो वह आधा ही फल देने वाला बताया गया है। अपने सेवकों को दिया हुआ दन एक चौथाई फल देने वाला होता है।
दत्तमर्थं हि भोगाय भूर्लोकेदशवार्षिकम्।
वेदयुक्तस्य विप्रस्य स्वर्गे हि दशवार्षिकम्॥२३॥
गायत्रीजपयुक्तस्य सत्ये हि दशवार्षिकम्।
विष्णुभक्तस्य विप्रस्य दत्तं वैकुंठदं विदुः॥२४॥
शिवभक्तस्य विप्रस्य दत्तं कैलासदं विदुः।
तत्तल्लोकोपभोगार्थं सर्वेषां दानमिष्यते॥२५॥
विप्रवरों! जो जातिमात्र से ब्राह्मण है और दीनतापूर्ण वृत्ति से जीवन बिताता है, उसे दिया हुआ धन का दान दाता को इस भूतल पर दस वर्षों तक भोग प्रदान करने वाला होता है। वही दान यदी वेदवेत्ता ब्राह्मण को दिया जावे तो वह स्वर्ग लोक मे देवताओं के वर्ष के अनुसार दस वर्षों तक दिव्य भोग देने वाला होता है। एवं विष्णुभक्त ब्राह्मण को दिया गया दान वैकुण्ठ का वास प्रदान कराता है। शिवभक्त ब्राह्मण को दिया गया दान इस लोक के सभी भोग तथा अन्त में कैलाश पर भगवान शिव का सामिप्य प्रदान कराता है।
दशांगमन्नं विप्रस्य भानुवारे ददन्नरः।
परजन्मनि चारोग्यं दशवर्षं समश्नुते॥२६॥
रविवार के दिन जो भी नर ब्राह्मणों को दस प्रकार के अन्न का दान करता है, वह दस वर्षों तक आरोग्य पुर्ण जीवन प्राप्त करता है,
बहुमानमथाह्वानमभ्यंगं पादसेवनम्।
वासो गंधाद्यर्चनं च घृतापूपरसोत्तरम्॥२७॥
षड्रसं व्यंजनं चैव तांबूलं दक्षिणोत्तरम्।
नमश्चानुगमश्चैव स्वन्नदानं दशांगकम्॥२८॥
दशांगमन्नं विप्रेभ्यो दशभ्यो वै ददन्नरः।
अर्कवारे तथाऽऽरोग्यं शतवर्षं समश्नुते॥२९॥
सोमवारादिवारेषु तत्तद्वारगुणं फलम्।
अन्नदानस्य विज्ञेयं भूर्लोके परजन्मनि॥३०॥
जो भी मनुष्य ब्राह्मणों का पद-प्रक्षालन कर गंधादि उपचारों से पुजन कर षडरसयुक्त अन्न, व्यंजन, पान आदि दस प्रकार के अन्न दान करता है, वह सो वर्षों तक आरोग्य जीवन व्यतित करता है। और यदि सोमवार के दिन इस प्रकार दान किया जाय तो दोगुना फल प्राप्त करता है तथा पुर्व जन्म के भी पाप नष्ट हो जाते है।
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