ShivPuraan in hindi kathaa chepter 15 (श्रीशिवमहापुराण- पंद्रहवाँ अध्याय: देश, काल, पात्र और दान आदि का विचार), page:4
 
। । ॐ नमः शिवाय । ।

श्रीशिवमहापुराण-विद्येश्वरसंहिता: पंद्रहवाँ अध्याय

देश, काल, पात्र और दान आदि का विचार : पृष्ठ 4


सप्तस्वपि च वारेषु दशभ्यश्च दशांगकम्।
अन्नं दत्त्वा शतं वर्षमारोग्यादिकमश्नुते॥३१॥
एवं शतेभ्यो विप्रेभ्यो भानुवारे ददन्नरः।
सहस्रवर्षमारोग्यं शर्वलोके समश्नुते॥३२॥
जो भी मनुष्य सातों वारों को अन्नदान करता है वह सौ वर्षों तक आरोग्य पुर्वक जीवन जीता है। एवं सौ ब्राह्मणों को केवल रविवार के दिन अन्नदान करने से मनुष्य हजार वर्षों तक आरोग्य पुर्वक जीवन जीता है।
सहस्रेभ्यस्तथा दत्त्वाऽयुतवर्षं समश्नुते।
एवं सोमादिवारेषु विज्ञेयं हि विपश्चिता॥३३॥
भानुवारे सहस्राणां गायत्रीपूतचेतसाम्।
अन्नं दत्त्वा सत्यलोके ह्यारोग्यादि समश्नुते॥३४॥
अयुतानां तथा दत्त्वा विष्णुलोके समश्नुते।
अन्नं दत्त्वा तु लक्षाणां रुद्रलोके समश्नुते॥३५॥
गायत्रीयुक्त ब्रह्मण को अन्न-दान करने का फल इस प्रकार कहा गया है; यह दान सोमवार तथा रविवार को करने से हृदय रोग से मुक्ति प्राप्त होती है तथा अन्त मे सत्यलोक मे निवास प्राप्त होता है। जो अन्न किसी का दिया हुआ अर्थात स्वयं कमाया हो उसे दान करने से विष्णुलोक तथा रुद्रलोक का निवास प्राप्त होता है।
बालानां ब्रह्मबुद्ध्या हि देयं विद्यार्थिभिर्नरैः।
यूनां च विष्णुबुद्ध्या हि पुत्रकामार्थिभिर्नरैः॥३६॥ वृद्धानां रुद्रबुद्ध्या हि देयं ज्ञानार्थिभिर्नरैः।
बालस्त्रीभारतीबुद्ध्या बुद्धिकामैर्नरोत्तमैः॥३७॥ लक्ष्मीबुद्ध्या युवस्त्रीषु भोगकामैर्नरोत्तमैः।
वृद्धासु पार्वतीबुद्ध्या देयमात्मार्थिभिर्जनैः॥३८॥
बालकों को दान करने से ब्रह्माजी विद्या, युवाओं को दान करने से विष्णुजी पुत्र प्राप्ती, वृद्धजनों को दान करने से भगवान रुद्र ज्ञान, बालक व स्त्री को दान करने से माँभारती बुद्धि, युवास्त्री को दान करने से माँलक्ष्मी भोग, वृद्धा-स्त्री को दान करने से माँपार्वती आत्मज्ञान प्रदान करते है।
शिलवृत्त्योञ्छवृत्त्या च गुरुदक्षिणयार्जितम्।
शुद्धद्रव्यमिति प्राहुस्तत्पूर्णफलदं विदुः॥३९॥
शिल और उच्छ वृत्ति से लाया हुआ और गुरुदक्षिणा मे प्राप्त हुआ अन्न-धन शुद्ध द्रव्य कहलाता है। उसका दान दानदाता को पूर्ण फल देने वाला बताया गया है।
शुक्लप्रतिग्रहाद्दत्तं मध्यमं द्रव्यमुच्यते।
कृषिवाणिज्यकोपेतमधमं द्रव्यमुच्यते॥४०॥
किसी से छिना हुआ या दुसरे का दिया हुआ अथवा ब्याज आदि से कमाया गया धन मध्यम द्रव्य कहलाता है।
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