ग्रामीण अंचल में स्थित एक गाँव में एक धार्मिक प्रवृति के पंडित जी निवास करते थे| गाँव के निकट ही .....
 
आस्था व विश्वास तथा कामना रहित भक्ति
ग्रामीण अंचल में स्थित एक गाँव में एक धार्मिक प्रवृति के पंडित जी निवास करते थे| गाँव के निकट ही एक छोटा सा जंगल था ,जिसमे एक पक्का कुआ बना हुआ था,व उसपर पानी खीचने के लिए एक बाल्टी रखी रहती थी ,पंडित जी नित्य प्रातः उस कूए पर जा स्नान करते थे ,व अपनी उंगलियों का जाल सा बनाकर सूर्यदेव कि ओर देखते थे,और जल इत्यादि अर्पण कर गाँव चले जाते थे| कुए के निकट ही एक ग्वाला गाय भैस चराया करता था और पंडित जी को नित्य यह क्रिया करते देखा करता था| एक दिन जब पंडित जी स्नान आदि के पश्चात् वही क्रिया करने लगे तो वह ग्वाला उनके पास पंहुचा ,और बोला -" पंडित जी नहाना तो ठीक है ,पर आप उंगलियों को बनाकर सूरज की ओर क्या देखते हैं ?
पंडित जी उस ग्वाले को मूर्ख समझकर बोले कि इस तरह भगवान का दर्शन करते हैं| यह कहकर वो चले गए तब उस भोले भाले ग्वाले ने यह सहज विश्वास कर लिया कि पंडित जी को भगवान दिखते होंगे ,व उसने मन ही मन सोचा कि कल को मैं भी इसी तरह क्रिया कर भगवान को देखूंगा|
दूसरे दिन पंडित जी के जाने के बाद उसने उस कूए पर स्नान किया और उंगलियों का जाल बनाकर सूर्यदेव की ओर देखा किन्तु उसे कुछ भी दिखाई नहीं दिया ,उसने मन मे सोचा शायद मेरे नहाने मे कुछ कमी रह गयी है ।इसलिए भगवान नहीं दिखे ,,अब दुबारा नहाकर देखता हू| इसी तरह वो बार बार सोचता और बार बार नहाता रहा| दिन ढल गया व शाम हो गयी किन्तु भगवान नहीं दिखे| चूँकि पंडित जी ने कहा था ,इसलिए उस ग्वाले को विश्वास था कि भगवान दिखते तो होंगे पर किसी कारण से मुझे ही नहीं दिख रहे ,अंत मे उसने दुखी हो उंगलियों का जाल बनाकर फिर सूर्यदेव कि ओर देखा व बोला कि भगवान जी अब तो आप बहुत ज्यादा परेशान कर रहे हो या तो अबकी बार दिख जाओ नहीं तो मैं इसी कुए मे कूदकर अपने प्राण त्याग दूंगा| उसकी यह भोली आस्था देखकर भगवान साकार रूप लेकर प्रकट हो गए व उसे आकाश मे दिखाई दिए ,व उस ग्वाले से बोले कि पुत्र वरदान मांगो| वह ग्वाला बोला कि देखो भगवान जी बस मैं यही चाहता हू ,कि आप बस मुझे इतना परेशान न करे| जैसे पंडित जी को एक बार नहाने पर ही दिख जाते हो वैसे ही मुझे भी एक बार मे ही दिख जाया करो ,| " ऐसा ही हो " कहकर प्रभु अंतर्ध्यान हो गए| दूसरे दिन पंडित जी कुए पर नहाने पहुचे तो उस ग्वाले ने उनसे कहा कि पंडित जी भगवान जी ने तो बड़ी मुश्किल से दर्शन दिए ,आपको तो एक बार में ही दिख जाते हैं,लेकिन मुझे तो पूरा दिन नहाते नहाते निकल गया और जब कुए मे कूदने को तैयार हो गया तब कही जाकर दिखे परन्तु अब भगवान मान गए हैं ,कि अब एक ही बार नहाने पर ही दिख जाया करूँगा| पंडित जी को घोर आश्चर्य हुआ व वे ग्वाले से प्रार्थना करने लगे कि हे पुत्र किसी तरह मुझे भी एक बार भगवान के दर्शन करा दो ,तब ग्वाले ने स्नान किया और भगवान से प्रार्थना की कि भगवान जी इन पंडित जी को भी कृपया एक बार दिख जाओ ,तो प्रभु बोले कि यह पंडित मेरे दर्शनों का अधिकारी नहीं है ,यह केवल दिखावा करता था और इसे मुझपर इतना भी विश्वास नहीं था कि मैं साकार रूप में इसे दिख भी सकता हू ,,ऐसा कहकर प्रभु अंतर्ध्यान हो गए|
कथा मर्म ---- पूर्ण आस्था व विश्वास तथा कामना रहित भक्ति या योग से जो साधक ईश्वर प्राप्ति चाहता है ,उसे ही ईश्वर प्राप्ति सम्भव है|Posted at 15 Nov 2018 by admin
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