एक व्यक्ति प्यास से बेचैन भटक रहा था. उसे गंगाजी दिखाई पड़ी. पानी पीने के लिए नदी की ओर तेजी से भा.....
 
सच्चा सन्यास
एक व्यक्ति प्यास से बेचैन भटक रहा था. उसे गंगाजी दिखाई पड़ी. पानी पीने के लिए नदी की ओर तेजी से भागा लेकिन नदी तट पर पहुंचने से पहले ही बेहोश होकर गिर गया.
थोड़ी देर बाद वहां एक संन्यासी पहुंचे. उन्होंने उसके मुंह पर पानी का छींटा मारा तो वह होश में आया. व्यक्ति ने उनके चरण छू लिए और अपने प्राण बचाने के लिए धन्यवाद करने लगा.
संन्यासी ने कहा- बचाने वाला तो भगवान है. मुझमें इतना सामर्थ्य कहां है ? शक्ति होती तो मेरे सामने बहुत से लोग मरे मैं उन्हें बचा न लेता. मैं तो सिर्फ बचाने का माध्यम बन गया.
इसके बाद संन्यासी चलने को हुए तो व्यक्ति ने कहा कि मैं भी आपके साथ चलूंगा. संन्यासी ने पूछा- तुम कहां तक चलोगे. व्यक्ति बोला- जहां तक आप जाएंगे.
संन्यासी ने कहा मुझे तो खुद पता ही नहीं कि कहां जा रहा हूं और अगला ठिकाना कहां होगा. संन्यासी ने समझाया कि उसकी कोई मंजिल नहीं है लेकिन वह अड़ा रहा. दोनों चल पड़े.
कुछ समय बाद व्यक्ति ने कहा- मन तो कहता है कि आपके साथ ही चलता रहूं लेकिन कुछ टंटा गले में अटका है. वह जान नहीं छोड़ता. आपकी ही तरह भक्तिभाव और तप की इच्छा है पर विवश हूं.
संन्यासी के पूछने पर उसने अपने गले का टंटा बताना शुरू किया. घर में कोई स्त्री और बच्चा नहीं है. एक पैतृक मकान है उसमें पानी का कूप लगा है.
छोटा बागीचा भी है. घर से जाता हूं तो वह सूखने लगता है. पौधों का जीवन कैसे नष्ट करूं. नहीं रहने पर लोग कूप को गंदा करते हैं. नौकर रखवाली नहीं करते, बैल भूखे रहते हैं. बेजुबान जानवर है उसे कष्ट दूं.
बहुत से संगी-साथी हैं जो मेरे नहीं होने से उदास होते हैं, उनके चेहरे की उदासी देखकर उनका मोह भी नहीं छोड़ पाता.
दादा-परदादा ने कुछ लेन-देन कर रखा था. उसकी वसूली भी देखनी है. नहीं तो लोग गबन कर जाएंगे. अपने नगर से भी प्रेम है.
बाहर जाता हूं तो मन उधर खिंचा रहता है. अपने नगर में समय आनंदमय बीत जाता है. लेकिन मैं आपकी तरह संन्यासी बनना चाहता हूं. राह दिखाएं.
संन्यासी ने उसकी बात सुनी फिर मुस्कराने. लगे. उन्होंने कहा- जो तुम कर रहे हो वह जरूरी है. तुम संन्यास की बात मत सोचो. अपना काम करते रहो.
व्यक्ति उनकी बात समझ तो रहा था लेकिन उस पर संन्यासी बनने की धुन भी सवार थी.
चलते-चलते उसका नगर आ गया. उसे घर को देखने की इच्छा हुई. उसने संन्यासी से बड़ी विनती की- महाराज मेरे घर चलें. कम से कम 15 दिन हम घर पर रूकते हैं. सब निपटाकर फिर मैं आपके साथ निकल जाउंगा.
संन्यासी मुस्कुराने लगे और खुशी-खुशी तैयार हो गए. उसकी जिद पर संन्यासी रूक गए और उसे बारीकी से देखने लगे.
सोलहवें दिन अपना सामान समेटा और निकलने के लिए तैयार हो गए. व्यक्ति ने कहा-महाराज अभी थोड़ा काम रहता है. पेड़-पौधों का इंतजाम कर दूं. बस कुछ दिन और रूक जाएं निपटाकर चलता हूं.
संन्यासी ने कहा- तुम हृदय से अच्छे हो लेकिन किसी भी वस्तु से मोह त्यागने को तैयार ही न हो. मेरे साथ चलने से तुम्हारा कल्याण नहीं हो सकता. किसी भी संन्यासी के साथ तुम्हारा भला नहीं हो सकता.
उसने कहा- कोई है ही नहीं तो फिर किसके लिए लोभ-मोह करूं.
संन्यासी बोले- यही तो और चिंता की बात है. समाज को परिवार समझ लो, उसकी सेवा को भक्ति. ईश्वर को प्रतिदिन सब कुछ अर्पित कर देना. तुम्हारा कल्याण हो इसी में हो जाएगा. कुछ और करने की जरूरत नहीं.
वह व्यक्ति उनको कुछ दूर तक छोड़ने आया. विदा होते-होते उसने कहा कि कोई एक उपदेश तो दे दीजिए जो मेरा जीवन बदल दे.
संन्यासी हंसे और बोले- सत्य का साथ देना, धन का मोह न करना. उन्होंने विदा ली.
कुछ साल बाद वह संन्यासी फिर वहां आए. उस व्यक्ति की काफी प्रसिद्धि हो चुकी थी. सभी उसे पक्का और सच्चा मानते थे. लोग उससे परामर्श लेते. छोटे-मोटे विवाद में वह फैसला देता तो सब मानते.उसका चेहरा बताता था कि संतुष्ट और प्रसन्न है.
संन्यासी कई दिन तक वहां ठहरे. फिर एक दिन अचानक तैयार हो गए चलने को.
उस व्यक्ति ने कहा- आप इतनी जल्दी क्यों जाने लगे. आपने तो पूछा भी नहीं कि मैं आपके उपदेश के अनुसार आचरण कर रहा हूं कि नहीं.
संन्यासी ने कहा- मैंने तुम्हें कोई उपदेश दिया ही कहां था ? पिछली बार मैंने देखा कि तुम्हारे अंदर निर्जीवों तक के लिए दया है लेकिन धन का मोह बाधा कर रहा था. वह मोह तुम्हें असत्य की ओर ले जाता था हालांकि तुम्हें ग्लानि भी होती थी.
तुम्हारा हृदय तो सन्यास के लिए ऊर्वर था. बीज पहले से ही पड़े थे, मैंने तो बस बीजों में लग रही घुन के बारे में बता दिया. तुमने घुन हटा दी और फिर चमत्कार हो गया. संन्यास संसार को छोड़कर ही नहीं प्राप्त होता. अवगुणों का त्याग भी संन्यास है.
हम सब में उस व्यक्ति की तरह सदगुण हैं. जरूरत है उन्हें निखारने की. निखारने वाले की. अपने काम करने के तरीके में थोड़ा बदलाव करके आप चमत्कार कर सकते हैं.
एक बदलाव आजमाइए- हर किसी से प्रेम से बोलें. उनसे ज्यादा मीठा बोलेंगे जिन पर आपका शासन है. आपमें जो मधुरता आ जाएगी वह जीवन बदल देगी. कम से कम इसे आजमाकर देखिए.Posted at 23 Apr 2020 by admin
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