भगवान श्रीराम श्रीराम (श्रीरामचन्द्र), प्राचीन भारत में अवतर Strotras
 
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भगवान श्रीराम
श्रीराम (श्रीरामचन्द्र), प्राचीन भारत में अवतरित, भगवान हैं। हिन्दू धर्म में, श्रीराम, विष्णु के १० अवतारों में से सातवें हैं। श्रीराम का जीवनकाल एवं पराक्रम, महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित, संस्कृत महाकाव्य श्रीरामायण के रूप में लिखा गया है| उन पर तुलसीदास ने भी भक्ति काव्य श्री श्रीरामचरितमानस रचा था। श्रीरामचन्द्र हिन्दुओं के आदर्श पुरुष हैं। श्रीराम, अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के सबसे बडे पुत्र थे। श्रीराम की पत्नी का नाम सीता था (जो लक्ष्मी का अवतार मानी जाती हैं) और इनके तीन भाई थे- लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न। हनुमान, भगवान श्रीराम के, सबसे बड़े भक्त माने जाते है। श्रीराम ने राक्षस जाति के राजा रावण का वध किया|

श्रीराम की प्रतिष्ठा मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में है। श्रीराम ने मर्यादा के पालन के लिए राज्य, मित्रा, माता पिता, यहाँ तक की पत्नी का भी साथ छोडा। इनका परिवार आदर्श भारतीय परिवार का प्रतिनिधित्व करता है। श्रीराम रघुकुल में जन्में थे, जिसकी परंपरा प्राण जाए पर वचन ना जाये की थी। पिता दशरथ ने सौतेली माता कैकेयी को वचन दिया था, उसकी 2 इच्छा ( वर) पुरे करने का। कैकेयी ने इन वर के रूप में अपने पुत्र भरत को अयोध्या का राजा और श्रीराम के लिए 14 वर्ष का वनवास माँगा। पिता के वचन की रक्षा के लिए श्रीराम ने खुशी से 14 वर्ष का वनवास स्वीकार किया। पत्नी सीता ने आदर्शपत्नी का उदहारण पेश करते हुए पति के साथ वन जाना पसंद किया। लक्ष्मणजी ने भी भाई का साथ दिया। भरतजी ने न्याय के लिए माता का आदेश ठुकराया और बड़े भाई श्रीराम के पास वन जाकर उनकी चरणपादुका(चप्पल) ले आए। फिर इसे ही राज गद्दी पर रख कर राजकाज किया। श्रीराम की पत्नी सीता को रावण हरण(चुरा) कर ले गया। श्रीराम ने उस समय की एक जनजाति वानर के लोगो की मदद से सीता को ढूंढा। समुद्र में पुल बना कर रावण के साथ युद्ध किया। उसे मार कर सीता को वापस लाये। जंगल में श्रीराम को हनुमान जैसा दोस्त और भक्त मिला जिसने श्रीराम के सारे कार्य पुरे कराये। श्रीराम के आयोध्या लौटने पर भरत ने राज्य उनको ही सौप दिया। श्रीराम न्याय प्रिय थे बहुत अच्छा शासन् किया। इसलिए आज भी अच्छे शासन को श्रीरामराज्य की उपमा देते हैं। हिन्दू धर्म के कई त्यौहार, जैसे दशहरा और दीपावली, श्रीराम की जीवन-कथा से जुडे हुए है।

नौमी तिथि मधुमास पुनीता, सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता।
मध्य दिवस अति सीत न घामा, पावन काल लोक बिश्श्रीरामा।।
श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड से।

वैज्ञानिक तथा प्लेनिटेरियम सॉफ्टवेयर के अनुसार श्रीराम जन्म 4 दिसम्बर 7,393 ई° पूर्व हुआ था, यह गणना हिन्दू कालगणना से मेल खाता है। वाल्मीकि पुराण के अनुसार श्रीराम जन्म के दिन पाँच ग्रह अपने उच्च स्थान में स्थापित थे, नौमी तिथि चैत्र शुक्लपक्ष तथा पुनर्वसु नक्षत्र था। जिसके अनुसार सूर्य मेष में 10 डिग्री, मंगल मकर में 28 डिग्री, ब्रहस्पति कर्क में 5 डिग्री पर, शुक्र मीन में 27 डिग्री पर एवं शनि तुला राशि में 20 डिग्री पर था। वाल्मीकि तथा तुलसीदास नें अपने ग्रंथों में लिखा है कि श्रीरामजन्म मध्यान्ह में हुआ था। पीवी वर्तक के अनुसार वाल्मीकि श्रीरामायण जैसी परिस्थितियाँ श्रीराम जन्म के दिन दोपहर 12:25 बजे दृश्य थीं।
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