भगवान श्रीहरि विष्णु शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम् Strotras
 
|| vishnuji ||
भगवान श्रीहरि विष्णु
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशम्।
विश्वाधारं गगनसदृशं मेघ वर्णं शुभाङगम्।।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं योगिभिर्ध्यानगम्यम्।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं सर्वलोकैकनाथम्।।

भावार्थ - जिनकी आकृति अतिशय शांत है, जो शेषनाग की शैया पर शयन किए हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है, जो ‍देवताओं के भी ईश्वर और संपूर्ण जगत के आधार हैं, जो आकाश के सदृश सर्वत्र व्याप्त हैं, नीलमेघ के समान जिनका वर्ण है, अतिशय सुंदर जिनके संपूर्ण अंग हैं, जो योगियों द्वारा ध्यान करके प्राप्त किए जाते हैं, जो संपूर्ण लोकों के स्वामी हैं, जो जन्म-मरण रूप भय का नाश करने वाले हैं, ऐसे लक्ष्मीपति, कमलनेत्र भगवान श्रीविष्णु को मैं प्रणाम करता हूँ।
भगवान विष्णु शंख, चक्र, गदा एवं पद्म धारण करते हैं। शंख शब्द का प्रतीक है, शब्द का तात्पर्य ज्ञान से है जो सृष्टि का मूल तत्त्व है। चक्र का अभिप्राय माया चक्र से है जो जड़ चेतन सभी को मोहित कर रही है। गदा ईश्वर की अनंत शक्ति का प्रतीक है और पद्म से तात्पर्य नाभि कमल से है जो सृष्टि का कारण है। इन चार शक्तियों से संपन्न होने के कारण हरि को चतुर्भुज कहा है।

भगवान विष्णु के दस मुख्य अवतार मान्यता प्राप्त हैं। यह निम्न हैं:

मत्स्य अवतार : मत्स्य (मछ्ली) के अवतार में भगवान विष्णु ने एक ऋषि को सब प्रकार के जीव-जन्तु एकत्रित करने के लिये कहा एक राक्षस ने जब वेदों को चुरा कर सागर में छुपा दिया, तब भगवान विष्णु ने मत्स्य रूप धारण करके वेदों को प्राप्त किया और उन्हें पुनः स्थापित किया।

कूर्म अवतार : कूर्म के अवतार में भगवान विष्णु ने क्षीरसागर के समुद्रमंथन के समय मंदर पर्वत को अपने कवच पर संभाला था। इस प्रकार भगवान विष्णु, मंदर पर्वत और वासुकि नामक सर्प की सहायता से देवों एंव असुरों ने समुद्र मंथन करके चौदह रत्नोंकी प्राप्ती की।

मोहिनी अवतार : कूर्म के अवतार के समय भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप भी धारण किया था।

वराहावतार : वराह के अवतार में भगवान विष्णु ने महासागर में जाकर भूमि देवी कि रक्षा की थी, जो महासागर की तह में पँहुच गयीं थीं। एक मान्यता के अनुसार इस रूप में भगवान ने हिरण्याक्ष नामक राक्षस का वध भी किया था।

नरसिंहावतार : नरसिंह रूप में भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद की रक्षा की थी और उसकेपिता हिरण्यकश्यप का वध किया था। इस अवतार से भगवान के निर्गुण होने की विद्या प्राप्त होती है।

वामन् अवतार : इसमें विष्णु जी वामन् (बौने) के रूप में प्रकट हुए। भक्त प्रह्लादके पौत्र, असुरराज राज बलि से देवतओं की रक्षा के लिए भगवान ने वामन अवतार धारण किया।

परशुराम अवतार: इसमें विष्णु जी ने परशुराम के रूप में असुरों का संहार किया।

राम अवतार: राम ने रावण का वध किया जो रामायण में वर्णित है।

कृष्णावतार : श्रीकृष्ण ने देवकी और वसुदेव के घर जन्म लिया था। उनका लालन पालन यशोदा और नंद ने किया था। इस अवतार का विस्तृत वर्णन श्रीमद्भागवत पुराण में मिलता है। इस अवतार में भगवान विष्णु ने अपना विराट स्वरूप/विश्वरूप धारण किया था।

कल्कि अवतार: इसमें विष्णुजी भविष्य में कलियुग के अंत में आयेंगे।और जब भगवान विष्णु कलयुग में अवतार लेंगे तब वह सफ़ेद घोड़े पर सवार होकर दुष्टों का नाश करेंगे।

अन्य अवतार
1. हंसावतार
2. धन्वंतरि
3. हयग्रीव अवतार
4.गजेन्द्रोधारावतार

जन्म अवतार -जिस अवतार में स्वयं भगवान विष्णु नहीं पर उनका अंश था वे जन्म अवतार कहलाये।
1. सनकादि अवतार 2. नर-नारायण
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