find here the historical Bhartiya Temples location, stories and all related information about the temples.
 
आवड़ माता का मंदिर (जैसलमेर)
जैसलमेर से करीब 130 किमी दूर स्थित माता तनोट राय (आवड़ माता) का मंदिर है। तनोट माता को देवी हिंगलाज माता का एक रूप माना जाता है। हिंगलाज माता शक्तिपीठ वर्तमान में पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के लासवेला जिले में स्थित है।भाटी राजपूत नरेश तणुराव ने तनोट को अपनी राजधानी बनाया था। उन्होंने विक्रमसंवत 828 में माता तनोट राय का मंदिर बनाकर मूर्ति को स्थापित किया था। भाटी राजवंशी और जैसलमेर के आसपास के इलाके के लोग पीढ़ी दर पीढ़ी तनोट माता की अगाध श्रद्धा के साथ उपासना करते रहे। कालांतर में भाटी राजपूतों ने अपनी राजधानी तनोट से हटाकर जैसलमेर ले गए परंतु मंदिर तनोट में ही रहा।..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

करणी माता का मंदिर (राजस्थान)
राजस्थान भारत का एक ऐसा राज्य जो जितनाखूबसूरत है उतना ही विचित्र भी। कहीं रेत के बड़े-बड़े अस्थायी पहाड़ हैं तो कहीं तालाब की सुंदरता। शौर्य और परंपराकी गाथाओं से सजती शाम जहाँ है तो वहीं आराधना का जलसा दिखते आठों पहर भी रेत की तरह ही फैले हैं। ऐसी ही तिलिस्मी दुनिया से दिखते इस मरूस्थल में आश्चर्यऔर कौतूहल का विषय लिए बसा देशनोक कस्बा।सुनहरी रेत के बीच अपनी आभा लिए दमक रहायह स्थान वैसे तो छोटा ही है पर इसकी महत्ता व ख्याति विदेश तक फैली हुई है। रेत के दामन में सुनहरे संगमरमर से गढ़ाएक मंदिर जिसकी नक्काशी यदि ऊपरी दिखावेसे आकर्षित करने की बात को चरितार्थ करती है तो भीतर..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

सोमनाथ ज्योतिर्लिंग (गुजरात)
[b]सोमनाथ के प्रथम ज्योतिर्लिंग की कथा :[/b] ह्न्दिओं के भारत में अनेक धर्मस्थल है। भारत देश धार्मिक आस्था और विश्वास का देश है। यहां शिवलिंग की विशेष रुप से पूजा की जाती है। सोमनाथ ज्योतिर्लिंग भारत का ही नहीं अपितु इस पृ्थ्वी का पहला ज्योतिर्लिंग है। यह मंदिर गुजरात राज्य में है। इस मंदिर कि यह मान्यता है, कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं देव चन्द्र ने किया था। विदेशी आक्रमणों के कारण यह 17 बार नष्ट हो चुका है। हर बार यह बनता और बिगडता रहा है। किवदंतियों के अनुसार इस स्थान पर ही भगवान श्री कृ्ष्ण ने अपनी देह का त्याग किया था। इस वजह से यहां आज भी भगवान शिव के साथ साथ भगवान श्री क..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

रामेश्वरम ज्योतिर्लिग (रामनाथपुरं, तमिलनाडू)
रामेश्वरम ज्योतिर्लिग भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिगों में से एक है। इस ज्योतिर्लिग के विषय में यह मान्यता है, कि इस ज्योतिर्लिग की स्थापना स्वयं हनुमान प्रिय भगवान श्रीराम ने की थी। भगवान राम के द्वारा स्थापित होने के कारण ही इस ज्योतिर्लिंग को भगवान राम का नाम रामेश्वरम दिया गया है। रामेश्वरम ज्योतिर्लिंग स्थापित करने का संबन्ध उस पौराणिक घटना से बताया जाता है, जिसमें भगवान श्रीराम ने अपनी पत्नी देवी सीता को राक्षसराज रावण की कैद से मुक्त कराने के लिए जिस समय लंका पर चढाई की थी। उस समय चढाई करने से पहले श्रीविजय का आशिर्वाद प्राप्त करने के लिए इस स्थान पर रेत से शिवलि..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिग (श्री शैल, आन्ध्र प्रदेश)
12 ज्योतिर्लिंगों की श्रेणी में मल्लिकार्जुन ज्योतिर्लिंग आता है। यह ज्योतिर्लिंग आन्ध्र प्रदेश में कृ्ष्णा नदी के तट पर श्री शैल नाम के पर्वत पर स्थित है। इस मंदिर का महत्व उतरी भारत में भगवान शिव के कैलाश पर्वत के समान कहा गया है। भारत के अनेक धार्मिक शास्त्र इसके धार्मिक और पौराणिक महत्व की व्याख्या करते है। कुछ धर्म ग्रन्थ इस धर्म की व्याख्या करते हुए कहते है, कि इस ज्योतिर्लिंग के दर्शन करने मात्र से ही व्यक्ति को उसके सभी पापों से मुक्ति मिलती है। उसके सभी मनोरथ पूरे होते है। एक पौराणिक कथा के अनुसार जहां पर यह ज्योतिर्लिंग है, उस पर्वत पर आकर शिव का पूजन करने से ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

त्रम्ब्केश्वर ज्योतिर्लिग (त्रम्ब्केश्वर, नासिक)
त्रम्ब्केश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर नासिक रोड स्टेशन से लगभग २८ किलोमीटर कि दूरी पर पहाड़ियों के बीच में स्थित है। यहाँ की प्राकृतिक सुन्दरता देखते ही बनती है। इस स्थान का विहंगम दृश्य देख कर ही पता चलता है कि इसकी सुन्दरता तो अद्भुत ही है, साथ ही इसके लिए हिन्दू धर्म में जो आस्था जुड़ी है उसने इसको और अधिक महत्वपूर्ण बना दिया है। भारत भूमि पर स्थित १२ ज्योतिर्लिंगों में से एक यहाँ पर है। यहाँ पर दर्शन के लिए लाइन में लगे लोगों को देख कर ही वहाँ के लोग बता देते हैं कि अभी ४ घंटे की लाइन लगी है। यहाँ पर सिर्फ त्रयम्बकेश्वर का ही महत्व नहीं हैं बल्कि गोदावरी नदी और ब्रह्मगिरी..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

वैद्यनाथ ज्योतिर्लिग (झारखंड)
बिहार से अलग हुए झारखंड राज्य में भगवान भोलेनाथ के द्वादश ज्योर्तिलिंगों में से एक नवम ज्योर्तिलिंग विराजमान है। इस ज्योर्तिर्लिंग को वैद्यनाथ धाम के नाम से जाना जाता है। [b]वैद्यनाथ धाम की पौराणिक कथा[/b] पौराणिक कथाओं के अनुसार यह ज्योर्तिलिंग लंकापति रावण द्वारा यहां लया गया था। इसकी एक बड़ी ही रोचक कथा है। रावण भगवान शंकर का परम भक्त था। शिव पुरण के अनुसार एक बार भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए रावण हिमालय पर्वत पर जाकर शिव लिंग की स्थापना करके कठोर तपस्या करने लगा। कई वर्षों तक तप करने के बाद भी भगवान शंकर प्रसन्न नहीं हुए तब रावण ने शिव को प्रसन्न करने के लिए अपन..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

केदारनाथ ज्योतिर्लिग (उत्तराखंड)
केदारनाथ मंदिर भगवान शिव को समर्पित एक हिंदू मंदिर है। यह भारत में केदारनाथ, उत्तराखंड में मंदाकिनी नदी के पास गढ़वाल हिमालय पर्वत श्रृंखला पर है। मौसम की खराब स्थिति के कारण मंदिर केवल कार्तिक पूर्णिमा (शरद ऋतु पूर्णिमा, आमतौर पर नवंबर) को अप्रैल (अक्षय Tritriya) के अंत के बीच खुला रहता है। सर्दियों के दौरान यहा देवताओं द्वारा छह महीने तक पूजा की जाती है । भगवान शिव केदारनाथ, 'केदार खंड के भगवान', इस क्षेत्र के ऐतिहासिक नाम के रूप में पूजा जाता है। अस्थिर मंदिर सड़क मार्ग से सीधे सुलभ नहीं है और एक 14 किलोमीटर (8.7 मील) Gaurikund से ऊपर की ओर ट्रेक द्वारा पहुंचा जा है। टट्टू और manchan सेवा संर..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिग (वाराणसी)
[b]श्री काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग वाराणसी (Kashi Vishwanath Temple, Varanasi): [/b]जनपद के काशी नगर में अवस्थित है। कहते है, काशी तीनों लोकों में न्यारी नगरी है, जो भोले बाबा के त्रिशूल पर विराजती है। इस मंदिर को कई बार बनाया गया। नवीनतम संरचना जो आज यहां दिखाई देती है वह 18वीं शताब्‍दी में बनी थी। कहा जाता है कि एक बार इंदौर की रानी अहिल्‍या बाई होलकर के स्‍वप्‍न में भगवान शिव आए। वे भगवान शिव की भक्‍त थीं। इसलिए उन्‍होंने 1777 में यह मंदिर निर्मित कराया। [b]काशी विश्वनाथ की महिमा (History of Kashi Vishwanath Temple): [/b]काशी भगवान शिव की प्रिय नगरी है। "हर हर महादेव घर-घर महादेव" का जयघोष" काशी के लिए ही किया जाता है। काशी मे..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

भीमेश्वर [भीमाशंकर] ज्योतिर्लिग (सेह्याद्री, पुणे)
श्री भीमेश्वर ज्योतिर्लिंग पुणे से लगभग 100 किलोमिटर दूर सेह्याद्री की पहाड़ी पर स्थित है। इसे भीमाशंकर भी कहते हैं। इस ज्योतिर्लिंग की स्थापना के विषय में शिवपुराण में यह कथा वर्णित है- प्राचीनकाल में भीम नामक एक महाप्रतापी राक्षस था। वह कामरूप प्रदेश में अपनी माँ के साथ रहता था। वह महाबली राक्षस, राक्षसराज रावण के छोटे भाई कुंभकर्ण का पुत्र था। लेकिन उसने अपने पिता को कभी देखा न था। उसके होश संभालने के पूर्व ही भगवान्‌ राम के द्वारा कुंभकर्ण का वध कर दिया गया था। जब वह युवावस्था को प्राप्त हुआ तब उसकी माता ने उससे सारी बातें बताईं। भगवान्‌ विष्णु के अवतार श्रीरामचं..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

घृष्‍णेश्‍वर ज्योतिर्लिग (औरंगाबाद, दौलताबाद, महाराष्ट्र)
महाराष्ट्र में औरंगाबाद के नजदीक दौलताबाद से 11 किलोमीटर दूर घृष्‍णेश्‍वर महादेव (Grishneshwar Mahadev Jyotirling Temple ) का मंदिर स्थित है। यह बारह ज्योतिर्लिंगों में से एक है। कुछ लोग इसे घुश्मेश्वर के नाम से भी पुकारते हैं। बौद्ध भिक्षुओं द्वारा निर्मित एलोरा की प्रसिद्ध गुफाएं इस मंदिर के समीप ही स्थित हैं। इस मंदिर का निर्माण देवी अहिल्याबाई होल्कर ने करवाया था। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में इसे अंतिम ज्योतिर्लिंग कहते हैं। इसे घुश्मेश्वर, घुसृणेश्वर या घृष्णेश्वर भी कहा जाता है। घुश्मेश्वर महादेव के दर्शन करने से सभी प्रकार के पाप नष्ट हो जाते हैं तथा उसी प्रकार सुख-समृद्धि होती है, ज..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

मथुरा: भगवान श्रीकृष्ण कि जन्मभूमि एवं क्रीड़ा स्थली
भारत की धरती पर युगों से चली आ रही तीर्थाटन की परंपरा को पर्यटन का जनक कहा जा सकता है। शायद इसीलिए 21वीं सदी में भी तीर्थाटन हमारे यहां एक जीवंत परंपरा के रूप में विद्यमान है। पिछले दिनों ऐसी ही किसी जगह जाने का मन बना तो हमने ब्रजभूमि की घुमक्कड़ी का कार्यक्रम बना लिया। फाल्गुन मास शुरू होते ही ब्रज में रंगों की अनोखी छटा बिखरने लगती है और उल्लास के उस माहौल में ब्रज की यात्रा का अपना अलग ही आनंद है। ब्रज यात्रा की तैयारी के दौरान हमने मथुरा और वृंदावन के अलावा ऐतिहासिक शहर आगरा को भी अपने कार्यक्रम में शामिल कर लिया। [b]क्रीड़ा स्थली कृष्ण की[/b] योगेश्वर कृष्ण की क्रीड़ा..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

महालक्ष्मी माता का मंदिर (काशी)
देवी भागवत् में कहा गया है कि संसार को उत्पन्न करने वाली शक्ति महालक्ष्मी माता हैं। सरस्वती, लक्ष्मी और काली यह सभी इन्हीं के स्वरूप से उत्पन्न हुई हैं। जिन पर महालक्ष्मी माता की कृपा हो जाती है उसकी सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं। इन्हीं महालक्ष्मी माता का एक मंदिर भगवान शिव की नगरी काशी में बसा हुआ है जिसे आज बनारस के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर को शक्तिपीठ के रूप में भी मान्यता प्राप्त है, यहां माता महालक्ष्मी की पूजा यूं तो सालों भर होती है लेकिन श्राद्घ के दिनों में इसका महत्व बढ़ जाता है। इस मंदिर के विषय में मान्यत है कि श्राद्घ के 16 दिनों में यानी भाद्रप..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

कैलाश मंदिर, औरंगाबाद (महाराष्ट्र)
दुनिया में कई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी ख़ूबसूरती के लिए जाने जाते हैं। लेकिन आज जिस मंदिर के बारे में हम आपको बता रहे हैं उस मंदिर को बनाने में 150 साल लगे थे। दरअसल, एलोरा की 34 गुफाओं में सबसे अदभुत है कैलाश मंदिर। विशाल कैलाश मंदिर देखने में जितना खूबसूरत है उससे भी ज्यादा खूबसूरत है इस मंदिर में किया गया काम। कैलाश मंदिर की खास बात यह है कि इसे इस विशालकाय मंदिर को तैयार करने में करीब 150 साल लगे और करीब 7000 मजदूरों ने लगातार इस पर काम किया। [b]कहां है ये कैलाश मंदिर[/b] यह मंदिर महाराष्ट्र के औरंगाबाद जिले में प्रसिद्ध एलोरा की गुफाओं में है। यह एलोरा के 16वीं गुफा की शोभा बढ़ा रहा ह..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

मणिमहेश ,भरमौर, चम्बा (हिमाचल प्रदेश)
खूबसूरत पर्वत श्रृंखलाओं से घिरा कैलाश पर्वत मणिमहेश कैलाश के नाम से भी प्रसिद्ध है. सैकडों वर्षो से तीर्थ यात्री व श्रद्धालु इस पवित्र मनोरम तीर्थस्थली की यात्रा करते आ रहे हैं. इसी स्थान पर मणिमहेश नामक एक छोटी सी पवित्र झील बहती है. यह झील समुद्र तल से लगभग 13,500 फुट की ऊंचाई पर स्थित है. तथा इस झील की पूर्व की दिशा में कैलाश पर्वत स्थित है. मणिमहेश हिमाचल प्रदेश में चम्बा जिले के भरमौर में आता है. इस पावन स्थल में हर वर्ष हजारों की संख्या में शिव भक्त मणि महेश झील में स्नान करने की इच्छा से आते हैं तथा विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना करते हैं. कहा जाता है कि राधा अष्टमी क..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

अमरनाथ, जम्मू कश्मीर
अमरनाथ हिन्दू धर्म का एक प्रमुख तीर्थस्थल है। यह कश्मीर राज्य के श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में 135 दूर समुद्रतल से 13,600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है। इस गुफा की लंबाई (भीतर की ओर गहराई) 19 मीटर और चौड़ाई 16 मीटर है। गुफा 11 मीटर ऊंची है। अमरनाथ 'गुफा' भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। यहां की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। आषाढ़ पूर्णिमा..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

आंजन धाम, नासिक (महाराष्ट्र)
यह पहले इन्द्र की सभा में पुंजिकस्थली नाम की अप्सरा थी। एक बार जब दुर्वासा ऋषि भी इन्द्र की सभा में उपस्थित थे, तो वह बार-बार भीतर आ-जा रही थी। इससे रुष्ट होकर ऋषि ने उसे वानरी हो जाने का शाप दे डाला। जब उसने बहुत अनुनय-विनय की, तो उसे इच्छानुसार रूप धारण करने का वर मिल गया। इसके बाद गिरज नामक वानर की पत्नी के गर्भ से इसका जन्म हुआ और अंजना नाम पड़ा। केसरी नाम के वानर से इनका विवाह हुआ और उनके गर्भ से हनुमान का जन्म हुआ।रामभक्त हनुमान का नाम सप्त चिरंजीवियों में शामिल है। देश-दुनिया में उनके अनेक मन्दिर हैं। कहा जाता है कि भगवान हनुमान जी के जन्म का इतिहास झारखंड के गुमला जिल..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

पांडुपोल हनुमान मंदिर, अलवर(राजस्थान)
पांडुपोल हनुमान मंदिर अलवर, राजस्थान में स्थित है। इस मन्दिर में हनुमान जी की लेटी हुई मुद्रा हैं। पौराणिक और ऐतिहासिक प्रदेश राजस्थान के सिंहद्वार के नाम से पहचाने जाने वाले अलवर शहर से 55 कि.मी. की दूरी पर स्थित है पांडुपोल हनुमान मंदिर। प्रसिद्ध वन्यजीव अभ्यारण्य सरिस्का के सुरम्य वातावरण और हरियाली से आच्छादित अरावली की पहाडि़यों में स्थित पांडुपोल हनुमान मंदिर का इतिहास महाभारत से जुड़ा हुआ है।प्रचलित मान्यताओं के मुताबिक अज्ञातवास के दौरान जब पांडव अपनी मां कुंती के साथ वन-वन की खाक छान रहे थे, उस समय ये लोग घूमते-घूमते अलवर के इस वन्य क्षेत्र में आ गए थे। बता..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

हनुमान मंदिर, मोहास (कटनी)
हनुमान मंदिर कटनी से 35 किलोमीटर दूर मोहास गांव में स्थित है। इस मंदिर में दर्शन करने के लिए लोग दर्द से कराहते हुए आते हैं, लेकिन जाते वक्त उनके चेहरे पर मुस्कान होती है। [b]मंगलवार और शनिवार को जुटती है ज्यादा भीड़:[/b]ऐसा कहा जाता है कि जो भी इस मंदिर में दर्शन करता है उसकी टूटी हुई हड्डियां अपने आप जुड़ जाती हैं। इस मंदिर में किसी अस्पताल से भी ज्यादा भीड़ लगती है। हर मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। इस मंदिर में हर रोज कुछ अलग ही देखने को मिलता है। किसी को स्ट्रेचर पर लाया जाता है तो किसी को एम्बुलेंस में। कोई-कोई तो पीठ पर लादकर भी लोगों को लाता है। [b]पीड़..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

गिरजाबंध हनुमान मंदिर (बिलासपुर)
गिरजाबंध हनुमान मंदिर - रतनपुर - एक अति प्राचीन मंदिर जहाँ स्त्री रूप में होती है हनुमान कि पूजा आपको सुनकर आश्चर्य लगेगा, लेकिन दुनिया में एक मंदिर ऐसा भी है जहां हनुमान पुरुष नहीं बल्कि स्त्री के वेश में नजर आते हैं। यह प्राचीन मंदिर बिलासपुर के पास है। हनुमानजी के स्त्री वेश में आने की यह कथा कोई सौ दौ सौ नहीं बल्कि दस हजार साल पुरानी मानी जाती है। गिरजाबंध में है स्तिथ : बिलासपुर से 25 कि. मी. दूर एक स्थान है रतनपुर। इसे महामाया नगरी भी कहते हैं। यह देवस्थान पूरे भारत में सबसे अलग है। इसकी मुख्य वजह मां महामाया देवी और गिरजाबंध में स्थित हनुमानजी का मंदिर है। खास बात य..........
Posted at 23 Apr 2020 by Admin

श्री राम राजा ओरछाधीश ओरछा जिला टीकमगढ़ (म.प्र)
बुंदेलखंड की अयोध्या है ओरछा , यह विश्व का अकेला मंदिर है जहां राम की पूजा राजा के रूप में होती है और उन्हें सूर्योदय के पूर्व और सूर्यास्त के पश्चात सलामी दी जाती है| ओरछा को दूसरी अयोध्या के रूप में मान्यता प्राप्त है। यहां पर रामराजा अपने बाल रूप में विराजमान हैं। यह जनश्रुति है कि श्रीराम दिन में यहां तो रात्रि में अयोध्या विश्राम करते हैं। शयन आरती के पश्चात उनकी ज्योति हनुमानजी को सौंपी जाती है, जो रात्रि विश्राम के लिए उन्हें अयोध्या ले जाते हैं- सर्व व्यापक राम के दो निवास हैं खास, दिवस ओरछा रहत हैं, शयन अयोध्या वास। शास्त्रों में वर्णित है कि आदि मनु- सतरूपा ने ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

हनुमान मंदिर, इलाहबाद, (उत्तर प्रदेश)
एक प्राचीन किंवदन्ती के अनुसार प्रयाग (इलाहबाद) का एक नाम इलाबास भी था। जो मनु की पुत्री इला के नाम पर था। प्रयाग के निकट झूसी या प्रतिष्ठानपुर में चन्द्रवंशी राजाओं की राजधानी थी। इसका पहला राजा इला और बुध का पुत्र पुरुरवा एल हुआ। उसी ने अपनी राजधानी को इलाबास की संज्ञा दी जिसका रूपांतर अकबर के समय में इलाहाबाद हो गया। इलाहबाद में सम्राट अकबर ने 1583 में यमुना तट पर किला बनवाया था। किले के अंदर 232 फुट का अशोक स्तम्भ सुरक्षित है। मंदिर लेटे हुए हनुमान जी की प्रतिमा: इलाहबाद में गंगा, यमुना, सरस्वती तीन भव्य नदियों का संगम होता है इसलिए भारत के प्रमुख पवित्र स्थानों में इलाह..........
Posted at 23 Apr 2020 by YK Solanki

शिवमंदिर का प्राचीन टूटी झरना मंदिर (झारखंड)
देवभूमि भारत ऋषि-मुनियों की तपोभूमि और चमत्कारिक भूमि है। जब धरती पर देवी-देवता रहते थे, तो उस काल में उनके निर्देशन में धरती पर ऐसे स्थानों की खोज की गई जो धरती के किसी न किसी रहस्य से जुड़े थे या जिनका संबंध दूर स्थित तारों से था। इसी के चलते भारत में हजारों चमत्कारिक मंदिर और स्थान निर्मित हो गए जिनको देखकर आश्चर्य होता है। हर मंदिर से जुड़ी एक कहानी है जिसपर लोग आस्था रखते हैं। ऐसा ही एक शिव मंदिर है जहां शिवलिंग में अपने आप ही होता है जलाभिषेक। झारखंड को राम के काल में दंडकारण्य का क्षेत्र कहा जाता था। यह उस काल में ऋषियों की तपोभूमि था। घने जंगलों से घिरे इस क्षे‍त्र ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग (भोपाल)
ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग को भोपाल का सर्वश्रेष्ठ ज्योतिर्लिंग माना गया है। यह ज्योतिर्लिंग मध्यप्रदेश में पुणे जिले में स्थित है। इस ज्योतिर्लिंग के बाद से दक्षिण भारत का प्रवेश प्रारम्भ होता है। जिस स्थान पर यह ज्योतिर्लिंग स्थित है, उस स्थान पर नर्मदा नदी बहती है। और पहाडी के चारों ओर नदी बहने से यहां ऊँ का आकार बनता है। ऊं शब्द की उत्पति ब्रह्रा के मुख से हुई है। इसका उच्चारण सबसे पहले जगत पिता देव ब्रह्ना जी ने किया था। किसी भी धार्मिक शास्त्र या वेदों का पाठ ऊँ नाम के उच्चारण के बिना नहीं किया जाता है। यह ज्योतिर्लिंग औंकार अर्थात ऊँ का आकार लिए हुए है। इस कारण इस..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

नागेश्वर महादेव (द्वारका, गुजरात)
नागेश्वर ज्योतिर्लिंग गुजरात प्रान्त के द्वारकापुरी से लगभग 25 किलोमीटर की दूरी पर अवस्थित है। यह स्थान गोमती द्वारका से बेट द्वारका जाते समय रास्ते में ही पड़ता है। द्वारका से नागेश्वर-मन्दिर के लिए बस,टैक्सी आदि सड़क मार्ग के अच्छे साधन उपलब्ध होते हैं। रेलमार्ग में राजकोट सेजामनगर और जामनगर रेलवे से द्वारका पहुँचा जाता है। पौराणिक इतिहास इस प्रसिद्ध शिवलिंग की स्थापना के सम्बन्ध में इतिहास इस प्रकार है- एक धर्मात्मा, सदाचारी और शिव जी का अनन्य वैश्य भक्त था, जिसका नाम ‘सुप्रिय’ था। जब वह नौका (नाव) पर सवार होकर समुद्र के जलमार्ग से कहीं जा रहा था, उस समय ‘दारूक’ न..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग (उज्जैन)
उज्जैन नगरी सदा से ही धर्म और आस्था की नगरी रही है। उज्जैन की मान्यता किसी तीर्थ स्थल से कम नहीं है। यहां पर स्थित महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग पूरे विश्व में एक मात्र ऎसा ज्योतिर्लिंग है। जो दक्षिण की और मुख किये हुए है। यह ज्योतिर्लिंग तांत्रिक कार्यो के लिए विशेष रुप से जाना जाता है। इसके अतिरिक्त इस ज्योतिर्लिग की सबसे बडी विशेषता यह है कि यह ज्योतिर्लिंग स्वयंभू है। अर्थात इसकी स्थापना अपने आप हुई है। इस धर्म स्थल में जो भी व्यक्ति पूरी श्रद्वा और विश्वास के साथ आता है। उस व्यक्ति के आने का औचित्य अवश्य पूरा होता है। महाकाल की पूजा विशेष रुप से आयु वृ्द्धि और आयु पर ..........
Posted at 23 Apr 2020 by admin

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