यह पहले इन्द्र की सभा में पुंजिकस्थली नाम की अप्सरा थी। एक बार जब दुर्वासा ऋषि भी इन्द्र की सभा .....
 
आंजन धाम, नासिक (महाराष्ट्र)
यह पहले इन्द्र की सभा में पुंजिकस्थली नाम की अप्सरा थी। एक बार जब दुर्वासा ऋषि भी इन्द्र की सभा में उपस्थित थे, तो वह बार-बार भीतर आ-जा रही थी। इससे रुष्ट होकर ऋषि ने उसे वानरी हो जाने का शाप दे डाला। जब उसने बहुत अनुनय-विनय की, तो उसे इच्छानुसार रूप धारण करने का वर मिल गया। इसके बाद गिरज नामक वानर की पत्नी के गर्भ से इसका जन्म हुआ और अंजना नाम पड़ा। केसरी नाम के वानर से इनका विवाह हुआ और उनके गर्भ से हनुमान का जन्म हुआ।

रामभक्त हनुमान का नाम सप्त चिरंजीवियों में शामिल है। देश-दुनिया में उनके अनेक मन्दिर हैं। कहा जाता है कि भगवान हनुमान जी के जन्म का इतिहास झारखंड के गुमला जिले के उत्तरी क्षेत्र में अवस्थित आंजन ग्राम से जुड़ा हुआ है। मान्यता है क‍ि हनुमान का जन्म आंजनधाम में स्थित पहाड़ी की गुफा में हुआ था और यहीं पर माता अंजनी ने भगवान हनुमान को जन्म दिया था। माता अंजनी के नाम से ही इस गांव का नाम आंजन पड़ा। यह देश का ऐसा पहला मंदिर है, जहां स्थापित मूर्ति में बाल हनुमान माता अंजनी की गाेद में बैठे हुए हैं।

आंजनधाम में 1953 में श्रद्धालुओं ने मिलकर अंजनी मंदिर की स्थापना की थी। यह गुमला शहर से 20 किमी दूर जंगलों के बीच है। जिस गुफा में हनुमान जी का जन्म हुआ था, उसका दरवाजा माता अंजनी ने बंद कर दिया था। कथा के अनुसार, एक बार यहां के आदिवासियों ने मां अंजनी को प्रसन्न करने के लिए बकरे की बलि दे दी परंतु इससे माता रुष्ट गईं। इसके बाद माता ने गुफा का द्वार बंद कर दिया। । आज भी यह गुफा आंजन धाम में मौजूद है।

आंजनधाम से जुड़ी और भी पौराणिक गाथाएं जुड़ी हैं। कहते हैं, गुमला जिले के पालकोट प्रखंड में बालि व सुग्रीव का राज्य था। पंपापुर सरोवर भी यहीं है, जहां भगवान राम और भ्राता लक्ष्मण ने रुककर स्नान भी किया था।Posted at 15 Nov 2018 by admin
FACEBOOK COMMENTES
  Share it --